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233 एकड़ जमीन की कमी से सौर कृषि वाहिनी मिशन संकट में, महावितरण के सामने बड़ी चुनौती

CM Solar Agriculture Scheme 2.0: भंडारा में सौर कृषि वाहिनी 2.0 को जमीन की भारी कमी का सामना। 233 एकड़ न मिलने से 102 मेगावाट लक्ष्य अधर में अटका।

प्रिया जैस

MSEDCL Bhandara Solar: भंडारा जिले में मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 के अंतर्गत कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा पर लाने के अभियान को जमीन की भारी कमी के कारण बड़ा झटका लगा है। मिशन 2025 के लक्ष्य को पाने के लिए महावितरण ने जिले में 37 उपकेंद्रों का चयन किया था।

हालांकि, खमारी (भंडारा), टेकेपार (भंडारा), कोका (भंडारा) और वरठी (मोहाडी) जैसे 4 प्रमुख 33/11 केवी उपकेंद्रों के 5 किलोमीटर के दायरे में अब तक एक एकड़ जमीन भी उपलब्ध नहीं हो सकी है। कुल आवश्यक 855 एकड़ जमीन में से 233 एकड़ (27.3 प्रतिशत) की कमी अब भी बनी हुई है। इन 4 केंद्रों के कारण संबंधित क्षेत्रों का सौर ऊर्जा लक्ष्य पूरी तरह से ठप हो गया है।

जमीन के इसी अभाव के कारण विकासक कंपनियां मुश्किल में हैं। ओम यश प्रोजेक्ट्स लिमिटेड और इंटीग्रेटेड इंडक्शन पावर जैसी कंपनियों को कार्यादेश मिलने के बावजूद जमीन के इंतजार में उनके बिजली खरीद समझौते लटके हुए हैं। मासल (लाखांदुर) उपकेंद्र में 30 एकड़ की आवश्यकता के मुकाबले केवल 22.9 एकड़ जमीन मिल पाई है। वहीं चितापुर (भंडारा) में जमीन तय होने के बाद भी सब-लीज प्रक्रिया लंबित होने से तकनीकी बाधाएं आ रही है।

18 उपकेंद्रों में शत-प्रतिशत जमीन उपलब्ध

जिले के 37 में से 18 उपकेंद्रों पर जमीन की 100 प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है। सालेभाटा (लाखनी) में 5 मेगावाट क्षमता के लिए 72.2 एकड़ निजी जमीन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। साथ ही करडी (मोहाडी) में 2 मेगावाट के लिए 36.91 एकड़ जमीन का अधिग्रहण सफल रहा है। गोल्डब्रिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विकासक ने 7 उपकेंद्रों के लिए 45 मेगावाट के बिजली खरीद समझौते पूरे कर काम तेज कर दिया है। नैकॉफ ऊर्जा और अनंता सोलर जैसी कंपनियों के समझौते भी पूरे हो चुके हैं।

  • उपकेंद्रों की कुल संख्या 37
  • कुल उपलब्ध भूमि (एकड़ में) 618 निजी भूमि
  • 4.22 सरकारी भूमि

महावितरण का 185 मेगावाट का कुल लक्ष्य

सौर ऊर्जा के कारण लगभग 3 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलेगी, जिससे राज्य सरकार का कृषि पंपों पर दिया जाने वाला भारी अनुदान बचेगा। जमीन पट्टे पर देने वाले किसानों को भी प्रति हेक्टेयर 1 लाख 25 हजार रुपये का वार्षिक मुआवजा मिलेगा, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।

लेकिन, दिसंबर 2025 तक 30 प्रतिशत कृषि बिजली आपूर्ति सौर ऊर्जा पर लाने का लक्ष्य पूरा करने के लिए शेष 233 एकड़ जमीन का तत्काल अधिग्रहण अनिवार्य है। जिले में 185 मेगावाट का कुल लक्ष्य है, लेकिन उसमें से केवल 83 मेगावाट क्षमता के समझौते ही पूरे हो पाए हैं। शेष 102 मेगावाट का भविष्य अभी अधर में है।

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