Nerla Lift Irrigation Project: नेरला उपसा सिंचाई परियोजना के अंतर्गत पिलांद्री स्थित माइनर क्रमांक-2 की नहर की पाल पिछले दो वर्षों से कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है। नहर में जगह-जगह गड्ढे हो जाने से सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। इस संबंध में हरितक्रांति पानी उपयोग समिति, खांबाड़ी पिलांद्री को कई बार मौखिक शिकायत किए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से किसानों में नाराजगी है। आखिरकार किसानों को ही श्रमदान कर नहर की मरम्मत करनी पड़ी।
पिलांद्री के किसानों ने जुलाई माह में तथा 27 सितंबर को नहर में बने गड्डों को मिट्टी-मुरुम से भरकर उसकी अस्थायी मरम्मत की। राजू वांढरे, विलास वांढरे, बलिराम वांढरे, ज्ञानिराम वांढरे, चक्रधर बोरकर, दिगंबर आरीकर, अजबराव आरीकर और धनपाल वांढरे सहित कई किसानों ने श्रमदान किया। किसानों का कहना है कि इससे पहले भी उन्होंने कई बार अपने खर्च पर तथा श्रमदान के माध्यम से नहर की मरम्मत की है।
किसानों ने आरोप लगाया कि नहर की लगातार बिगड़ती स्थिति की जानकारी संबंधित समिति के साथ-साथ नेरला उपसा सिंचाई परियोजना के मुख्य अभियंता तथा आंबाड़ी के कार्यकारी अभियंता को भी है, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। किसानों का कहना है कि सिंचाई परियोजना के माध्यम से पान उपलब्ध होने के बावजूद यदि नहर की पा और वितरिकाओं की मरम्मत नहीं की गई, इसका लाभ किसानों तक पहुंचाना मुश्कि होगा।
माइनर क्रमांक-2 की स्थिति जल्द नहीं सुधारी गई तो पिलांद्री क्षेत्र की करीब 150 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचाई से वंचित रह सकती है। किसानों के अनुसार नहरों और छोटी वितरिकाओं की सफाई तथा रखरखाव पर हर वर्ष खर्च किया जाता है, इसके बावजूद जमीनी स्तर पर किसानों को ही मरम्मत का कार्य करना पड़ रहा है।
इससे पानी उपयोग समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। किसानों ने मांग की है कि उनसे नियमित रूप से पानीपट्टी वसूलने के साथ ही सिंचाई व्यवस्था से जुड़ी उनकी समस्याओं पर भी तत्काल ध्यान दिया जाए। माइनर क्रमाक-2 की नहर की स्थायी मरम्मत कर सिंचाई का पानी सुचारु रूप से खेतों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए, ऐसी मांग पिलांदी के किसानों ने की है।