यवतमाल: बाभुलगांव में 17 साल से अधूरी खर्डा सिंचाई परियोजना, 7 गांवों के किसान पूछ रहे..कब मिलेगा पानी?

Yavatmal Irrigation Project: बाभुलगांव में खर्डा सिंचाई परियोजना का 90% काम पूरा होने के बावजूद प्रशासनिक मंजूरी न मिलने से 7 गांवों की 1175 हेक्टेयर भूमि सूखी है। काम जल्द पूरा करने की मांग।
Yavatmal Irrigation Project Babhulgaon Updates
धाम प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Yavatmal Irrigation Project Babhulgaon Updates: पिछले कई वर्षों से खर्डा सिंचाई परियोजना की फाइलें विभिन्न स्तरों पर घूम रही हैं, ऐसे में यह परियोजना आखिर कब पूरी होगी, यह सवाल यवतमाल जिले के बाभुलगांव तालुका के 7 गांवों के हजारों किसान लगातार उठा रहे हैं। खर्डा परियोजना पूरी होने पर तालुका के ग्राम खर्डा, गंवडी, किन्ही, फतियाबाद, गोंधली, बोरखेड और वाटखेड सहित 7 गांवों की 1,175 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा, लेकिन नासिक भेजे गए संशोधित प्रस्ताव को अब तक प्रशासनिक मंजूरी नहीं मिलने के कारण हजारों किसान सिंचाई सुविधा से वंचित हैं।

2009 में शुरू हुआ था काम, अब करोड़ों में पहुंची लागत

यह परियोजना केंद्र सरकार की बलीराजा संजीवनी योजना में शामिल है। परियोजना का निर्माण खर्डा गांव के नाले पर किया जा रहा है। इसका कार्य वर्ष 2009 में शुरू हुआ था। परियोजना को 29 करोड़ 16 लाख रुपये की प्रशासनिक मंजूरी मिली थी, जबकि अब तक 35 करोड़ 93 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। घळ भराई (अंतिम बंद कार्य) को छोड़कर मिट्टी का लगभग 90 प्रतिशत (90%) कार्य पूरा हो चुका है। यह एक लघु सिंचाई परियोजना है।

इसे पूरा करने के लिए सरूल गांव का पुनर्वास, महावितरण के 33 केवी (33 KV) उपकेंद्र का स्थानांतरण तथा उच्च दबाव विद्युत लाइन को हटाना आवश्यक है। लगभग 90 प्रतिशत (90%) कार्य पूरा होने के बावजूद यह परियोजना कई वर्षों से ठप पड़ी है। लगातार देरी से परियोजना की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है और इसकी लागत अब सैकड़ों करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

मंत्री के आश्वासन पर लोगों की निगाहें

कुछ समय पहले सरूल स्थित सिद्धेश्वर बागवाडी मंदिर में किसानों की बैठक के दौरान क्षेत्र के विधायक तथा राज्य के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने कहा था कि खर्डा मध्यम परियोजना का 90 प्रतिशत (90%) कार्य पूरा हो चुका है और केवल अंतिम बंद कार्य शेष है। उन्होंने सरूल गांव के पुनर्वास की आवश्यकता बताते हुए यवतमाल के जिलाधिकारी को पत्र भी सौंपा था।

इसके बाद उन्होंने किसानों के मुद्दे पर तत्काल बैठक बुलाने के निर्देश देते हुए एक और पत्र जिलाधिकारी को दिया। परियोजना के संशोधित प्रस्ताव को नाशिक कार्यालय से शीघ्र प्रशासनिक मंजूरी मिलना आवश्यक बताया जा रहा है।

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