Bhandara Monsoon Delay: जून का दूसरा सप्ताह शुरू होने के बावजूद जिले में मानसून की सक्रियता अब तक नहीं दिखी है। मृग नक्षत्र लगभग सूखा गुजरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। समय से बारिश नहीं होने के कारण इस वर्ष पारंपरिक 'धूल बुआई' के प्रति भी किसानों में उत्साह नहीं है।
अधिकांश किसान जल्दबाजी करने के बजाय अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कृषि विभाग ने भी पर्याप्त वर्षा होने तक बुवाई नहीं करने की सलाह दी है। जिले में खरीफ सीजन 2026 के लिए लगभग 1.98 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन बारिश की अनिश्चितता के कारण खेती की शुरुआत धीमी पड़ गई है।
इस वर्ष जिले में धान, अरहर, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। रोहिणी नक्षत्र पूरी तरह सूखा रहा, जबकि मृग नक्षत्र के शुरुआती दिनों में केवल हल्की बारिश हुई। इससे खेतों की तैयारी लगभग पूरी होने के बावजूद बुआई शुरू नहीं हो सकी है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 12 से 15 जून के बीच भी बारिश में कमी रहने की संभावना है। ऐसे में कृषि विभाग ने किसानों को स्पष्ट सलाह दी है कि कम से कम 40 मिलीमीटर वर्षा होने के बाद ही बुवाई करें, ताकि बीज खराब होने और दोबारा बुवाई की नौबत से बचा जा सके। धूल बुआई को लेकर किसानों में सतर्कता धूल बुआई एक पारंपरिक पद्धति है, जिसमें बारिश की संभावना को देखते हुए सूखी जमीन में पहले ही बीज बो दिए जाते हैं। हालांकि पिछले वर्षों के अनुभवों और मौसम की अनिश्चितता के कारण इस बार अधिकांश किसानों ने यह जोखिम लेने से परहेज किया है। बढ़ती बीज लागत और दोबारा बुवाई के खर्च से बचने के लिए किसान फिलहाल बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
कृषि विभाग ने खरीफ सीजन 2026 के लिए करीब 1.96 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों की बुवाई का लक्ष्य रखा है। इसमें सबसे अधिक 1.81 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाएगी। इसके अलावा 11,400 हेक्टेयर में अरहर तथा 1,140 हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना में गन्ने की खेती भी शामिल है।
भंडारा जिला कृषि अधीक्षक अधिकारी संगीता माने ने बताया कि जिले में खरीफ सीजन के लिए बीज और उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। बदलते मौसम को देखते हुए किसानों को पारंपरिक पद्धति के बजाय पेरीव तकनीक अपनानी चाहिए। इससे श्रम और उर्वरक की लागत कम होती है तथा प्रति एकड़ 8 से 10 हजार रुपये तक की बचत संभव है। विभाग विभिन्न तालुकों में इस तकनीक का प्रदर्शन कर किसानों को जागरूक कर रहा है।
किसान प्रभुदास येरणे ने कहा कि पिछले वर्ष कटाई के समय बारिश ने नुकसान पहुंचाया था, जिससे भारी आर्थिक हानि हुई। इस बार भी मौसम की अनिश्चितता बनी हुई है, इसलिए जल्दबाजी में बुवाई करने के बजाय पर्याप्त बारिश होने के बाद ही खेती शुरू करना सुरक्षित रहेगा।
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