Bhandara Highway Encroachment: राष्ट्रीय महामार्गों पर बढ़ते अतिक्रमण, अनधिकृत ढाबों, भोजनालयों और नियमबाह्य व्यावसायिक निर्माणों के खिलाफ अब प्रशासन कार्रवाई की तैयारी में है। सर्वोच्च न्यायालय के 13 अप्रैल के सुओ मोटो मामले में दिए निर्देशों के अनुपालन में महाराष्ट्र सरकार के नगर विकास विभाग ने परिपत्रक जारी किया है। इसमें राज्य की सभी महानगरपालिकाओं, नगर परिषदों और नगर पंचायतों को महामार्गों से जुड़े अतिक्रमणों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
60 दिनों में हटाने होंगे अनधिकृत निर्माण: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार राष्ट्रीय महामार्ग के राइट ऑफ वे क्षेत्र में नए ढाबे, होटल या किसी भी तरह के व्यावसायिक निर्माण पर रोक लगा दी गई है। पहले से मौजूद तथा नए अनधिकृत निर्माणों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत 60 दिनों के भीतर हटाने या ध्वस्त करने की समयसीमा तय की गई है।
राष्ट्रीय महामार्गों की सुरक्षा और अतिक्रमणमुक्ति के लिए प्रत्येक जिले में 'जिला महामार्ग सुरक्षा कार्यबल' गठित किया जाएगा। इसमें जिला प्रशासन, पुलिस, एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी और स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल होंगे। कार्यबल की हर 15 दिन में बैठक होगी। अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की होगी।
महामार्ग के सुरक्षा क्षेत्र में आने वाली किसी भी जगह के लिए एनएचएआई या पीडब्ल्यूडी की एनओसी के बिना स्थानीय निकाय नया लाइसेंस या व्यापारिक अनुमति जारी नहीं कर सकेंगे। पहले से जारी सभी लाइसेंसों की 30 दिनों के भीतर समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
परिपत्रक के अनुसार राष्ट्रीय महामार्ग के मध्य बिंदु से 40 मीटर तक आवासीय और 75 मीटर तक व्यावसायिक भूमि उपयोग में परिवर्तन पर रोक लगाने संबंधी अधिसूचना जारी की जाएगी। नगर विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि न्यायालय के आदेश की अवमानना किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।