RTO Bhandara: बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरणीय असंतुलन के बीच जिले में 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों की संख्या प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। जिले में हजारों पुराने वाहन अब भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिनसे निकलने वाला धुआं पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहा है।
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा लागू किए गए ग्रीन टैक्स के तहत 1 अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक जिले के 3,884 वाहन मालिकों से कर वसूला गया। इस माध्यम से परिवहन विभाग को 1 करोड़ 10 लाख 80 हजार 603 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। जिले के वाहन पंजीकरण आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से पहले पंजीकृत कुल 2 लाख 62 हजार 243 वाहन मौजूद हैं। इनमें लगभग 2 लाख 17 हजार दोपहिया और 1,350 तिपहिया वाहन शामिल हैं।
15 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों की बड़ी संख्या सड़कों पर सक्रिय है। विशेषज्ञों के अनुसार इन वाहनों के इंजन की कार्यक्षमता घटने के कारण इनसे अधिक मात्रा में प्रदूषक गैसों का उत्सर्जन होता है, जो पर्यावरण के लिए हानिकारक है। ग्रीन टैक्स का उद्देश्य पुराने वाहनों के उपयोग को नियंत्रित करना और वाहन मालिकों को इलेक्ट्रिक तथा सीएनजी जैसे कम प्रदूषण वाले विकल्पों की ओर प्रोत्साहित करना है। हालांकि जिले में पुराने वाहनों की संख्या की तुलना में ग्रीन टैक्स जमा कराने वालों की संख्या अभी भी कम मानी जा रही है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में जिले में केवल 20 वाहनों को ही आधिकारिक रूप से स्क्रैप किया गया है। इससे स्पष्ट है कि अधिकांश वाहन मालिक पुराने वाहनों को हटाने के बजाय उनका उपयोग जारी रखे हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि महानगरों की तुलना में भंडारा जिले में प्रदूषण का स्तर अभी नियंत्रित है, लेकिन भविष्य में यह गंभीर समस्या बन सकता है। इसलिए वाहन मालिकों को अपने पुराने वाहनों को आरटीओ नियमों के अनुसार स्क्रैप कराना चाहिए अथवा ग्रीन टैक्स जमा कर वाहन की फिटनेस और अन्य प्रमाणपत्र समयसमय पर अद्यतन कराते रहना चाहिए।
उप प्रादेशिक परिवहन अधिकारी सतीश जाधव ने कहा कि ग्रीन टैक्स केवल राजस्व संग्रह का माध्यम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। वाहन मालिकों को अपने वाहनों की फिटनेस सुनिश्चित करते हुए समय पर कर जमा करना चाहिए ताकि दंडात्मक कार्रवाई से बचा जा सके।
पर्यावरण विशेषज्ञ सईद शेख ने कहा कि पुराने वाहनों से निकलने वाली कार्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसें वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से पहले नागरिकों को जिम्मेदारी समझते हुए पर्यावरणअनुकूल वाहनों का उपयोग बढ़ाना चाहिए।