पुरानी गाड़ी से काम चलाएंगे अब महापौर, NMC प्रशासन ने बदली अपनी रणनीति, लग्जरी पर लगाया ब्रेक!

Nagpur Municipal Corporation: नागपुर के नए महापौर को फिलहाल पुरानी गाड़ी से करना होगा संतोष! मनपा प्रशासन ने नई गाड़ियों की खरीद पर लगाई रोक। जानें क्या है 25 लाख का वाहन प्रावधान।
New Nagpur Mayor to get an old car as NMC puts new vehicle purchases on hold. ₹25 lakh budget set for Mayor's car, but new leaders might wait for a while.
मेयर के लिए कार (AI Generated Image)
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NMC Administrator: नागपुर मनपा चुनाव परिणामों के बाद अब जल्द ही सिटी को नया महापौर मिलने जा रहा है। मनपा प्रशासन की ओर से इस संदर्भ में जारी किए गए निर्देशों के अनुसार केवल 7 दिनों में ही नये महापौर और उपमहापौर का चुनाव भी होगा। लगभग 4 वर्षों बाद नया महापौर तो चुना जाएगा किंतु उन्हें फिलहाल पुरानी गाड़ी पर ही संतोष करना पड़ेगा।

जानकारी के अनुसार हाल ही में महापौर, उपमहापौर, स्थायी समिति सभापति, परिवहन समिति सभापति, सत्ता पक्ष नेता और विपक्ष के नेता के लिए नये वाहन खरीदने को लेकर प्रशासन की ओर से तैयारियां की जा रही थीं किंतु अचानक इस प्रक्रिया पर ब्रेक लग गया है।

सूत्रों के अनुसार गुरुवार को मनपा मुख्यालय में हुई अधिकारियों की बैठक में फिलहाल नये महापौर को अतिरिक्त आयुक्त के पास की पुरानी गाड़ी देने का निर्णय लिया गया है, जबकि अन्य पदाधिकारियों के लिए किराये पर गाड़ियां लेने पर मंथन हुआ है।

मर्जी से गाड़ी खरीदने का मौका

नागपुर मनपा में अधिकारियों की हुई बैठक में भले ही फिलहाल नये महापौर और अन्य पदाधिकारियों के लिए वाहन खरीदने का विचार टाल दिया गया हो किंतु महापौर और अन्य पदाधिकारियों की ताजपोशी के बाद उनकी इच्छा के अनुरूप गाड़ियां खरीदने पर भी मंथन किया गया है। कुछ अधिकारियों का मानना था कि यदि प्रशासन स्वयं वाहन खरीदकर पदाधिकारियों को दे और यदि पदाधिकारियों की ओर से इन वाहनों को नकार दिया जाए तो फिर से नये वाहन खरीदने की नौबत आ सकती है।

  • 25 लाख तक मेयर के लिए प्रावधान
  • 12 लाख रुपये तक की अन्य पदाधिकारियों को गाड़ी

ऐसे में फिलहाल नये वाहन खरीदने का विचार ही टाल दिया गया है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो लंबे समय से प्रशासक राज में चल रहे प्रशासन को जनप्रतिनिधियों की संभावित नाराजगी की भनक लगने लगी है। यही कारण है कि जनप्रतिनिधियों की इच्छा के अनुसार कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है।

नहीं होगा टेंडर, सीधे खरीद-फरोख्त

जानकारी के अनुसार महापौर के लिए 25 लाख तक की गाड़ी खरीदने का प्रावधान है, जबकि अन्य पदाधिकारियों के लिए 12 लाख तक का ही प्रावधान है। प्रशासन की मानें तो सभी पदाधिकारियों के लिए वाहन खरीदने पर लगभग 1 करोड़ का खर्च होने का अनुमान है।

जानकारों का मानना है कि पद ग्रहण करते ही नये पदाधिकारियों की ओर से नये वाहनों की डिमांड की जाएगी जिसके लिए प्रावधानों के अतिरिक्त खर्च होने की संभावना है। माना जा रहा है कि दुर्बल घटक समिति जैसी कुछ संवैधानिक समिति सभापतियों को भी वाहन उपलब्ध कराया जाएगा।

आयुक्त के पास तत्कालीन महापौर का वाहन

उल्लेखनीय है कि मनपा में इसके पूर्व स्थायी समिति सभापति के लिए 2021 में ही नया वाहन खरीदा गया था जिसे बाद में महापौर के लिए उपलब्ध कराया गया। किंतु मार्च 2022 में प्रशासक राज शुरू होने के बाद महापौर का वाहन मनपा प्रशासक को उपलब्ध कराया गया। अत: अब महापौर के लिए नया वाहन खरीदने की आवश्यकता है।

इसी तरह अन्य पदाधिकारियों के लिए भी नये वाहन होंगे। मेयर, डिप्टी मेयर, स्थायी समिति अध्यक्ष और सदन के नेता को 24x7 आधिकारिक वाहन और ड्राइवर मिलता है। लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार विपक्ष के नेता को भी निर्धारित श्रेणी की गाड़ी दी जाती है। आमतौर पर मेयर के लिए एसयूवी और अन्य पदाधिकारियों के लिए सेडान या मध्यम श्रेणी की एसयूवी का प्रावधान होता है।

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