भंडारा में अवैध कैंटीन का मामला (सौजन्य-नवभारत) 
भंडारा

बिना टेंडर, बिना परमिशन...भंडारा में 'दबंगई' से चल रही कैंटीन; मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने झाड़ा पल्ला

Bhandara Medical College Canteen: भंडारा मेडिकल कॉलेज में 'अवैध कैंटीन' का खेल! बिना टेंडर सरकारी कमरे पर कब्जा और मुफ्त बिजली का उपयोग। डीन बोलीं- इमारत हमारे अधिकार में नहीं।

प्रिया जैस

Illegal Canteen Bhandara: भंडारा से शासकीय मेडिकल कॉलेज से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्य विभाग से विधिवत हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही मेडिकल कॉलेज ने जिला महिला अस्पताल की निर्माणाधीन इमारत पर कब्जा कर लिया है।

अब कहा जा रहा है कि इसी इमारत के दो कमरों पर एक निजी कैंटिन संचालक ने भी बिना किसी वैधानिक अनुमति के बलपूर्वक कब्जा जमा लिया है और इन दोनों कमरों में मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए चाय-नाश्ते की व्यवस्था शुरू कर दी है। इस अनधिकृत कैंटिन संचालन से संबंधित व्यक्ति को आर्थिक लाभ हो रहा है, जबकि शासन को एक रुपये की भी आय प्राप्त नहीं हो रही है।

इतना ही नहीं, जिस भवन में यह कैंटिन संचालित हो रहा है, वह शासकीय संपत्ति है और वहां उपयोग की जा रही बिजली का खर्च भी सरकारी खजाने से वहन किया जा रहा है।

सरकारी बिजली का उपयोग

कैंटिन में चाय-नाश्ता तैयार करने के लिए सरकारी बिजली का उपयोग किया जा रहा है, जिससे शासन पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है।नियमों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज प्रारंभ होने के बाद विद्यार्थियों के लिए कैंटिन की व्यवस्था विधिवत निविदा (टेंडर) प्रक्रिया के माध्यम से की जानी चाहिए। इसके तहत इच्छुक संचालकों से आवेदन आमंत्रित कर पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए अनुबंध दिया जाता है, जिससे शासन को राजस्व भी प्राप्त होता है।

आधिकारिक तौर पर कैंटिन शुरू नहीं

अभी तक आधिकारिक तौर पर कैंटिन शुरू नहीं हुई है। वह बिल्डिंग अधिकृत रूप से हमारे अंडर में नहीं है। इसलिए कार्रवाई का अधिकार हमें नहीं है, लेकिन हम जल्दी ही कैंटिन शुरू करने की दिशा में कदम उठाएंगे और अधिकृत रूप से टेंडर भी निकालेंगे।

  • डॉ. सुजाता दूधगांवकर, डीन, शासकीय मेडिकल कॉलेज।

जारी नहीं हुआ टेंडर

हालांकि, अब तक मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से कैंटिन संचालन के लिए न तो कोई टेंडर जारी किया गया है और न ही इस दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। इस स्थिति का लाभ उठाते हुए एक व्यक्ति ने बिना किसी अधिकृत अनुमति के मेडिकल कॉलेज की उक्त इमारत के दो कमरों पर कब्जा कर वहां चाय-नाश्ते की दुकान प्रारंभ कर दी।

आश्चर्य की बात यह है कि इस अवैध कैंटिन में केवल विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि मेडिकल कॉलेज के कुछ कर्मचारी भी आते-जाते देखे जा रहे हैं, जिससे पूरे प्रकरण पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मामले में न तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है और न ही जिला अस्पताल की ओर से किसी प्रकार की अनुमति की पुष्टि की गई है।

ऐसे में यह प्रश्न उठ रहा है कि शासकीय भवन में बिना अनुमति व्यावसायिक गतिविधि कैसे संचालित हो रही है और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस अनधिकृत कब्जे और अवैध कैंटिन संचालन पर क्या कार्रवाई करता है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है।

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