प्रफुल्ल अग्रवाल उम्मीदवार के तौर पर नामांकन करते हूए (सोर्स - नवभारत) 
भंडारा

अविनाश ब्राह्मणकर बनाम दिलीप बंसोड! भंडारा-गोंदिया MLC Election में प्रतिष्ठा की जंग तेज

MLC Election: भंडारा-गोंदिया स्थानीय स्वराज्य संस्था विधान परिषद चुनाव में भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय प्रफुल्ल अग्रवाल के उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प हो गया है।

केतकी मोडक

Bhandara Gondia MLC Election: भंडारा-गोंदिया स्थानीय स्वराज्य संस्था से विधान परिषद चुनाव के बहाने दोनों जिलों की राजनीति में एक नया और बेहद दिलचस्प अध्याय शुरू हो गया है। नामांकन पत्र दाखिल करने के आखिरी दिन जिलाधिकारी कार्यालय परिसर पूरी तरह से राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का अखाड़ा बना रहा। महायुति की मजबूत घेराबंदी और महाविकास आघाड़ी की पुरानी रणनीति के बीच होने जा रहा यह मुकाबला अब केवल एक चुनाव न रहकर वर्चस्व और प्रतिष्ठा की बड़ी लड़ाई में तब्दील हो चुका है।

भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अविनाश ब्राह्मणकर पर भरोसा जताते हुए उन्हें चुनावी मैदान में उतारा है। विधानसभा चुनाव के दौरान साकोली सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता नाना पटोले को कड़ी टक्कर देने वाले ब्राह्मणकर का सियासी सफर कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायक रहा है। साकोली में मामूली अंतर से चुनाव हारने के बावजूद उनके बढ़ते जनाधार को देखते हुए भाजपा ने उन्हें विधान परिषद का टिकट देकर पुरस्कृत किया है। सोमवार को नामांकन 'भरने के दौरान महायुति की एकजुटता साफ नजर आई, जहां सांसद प्रफुल्ल पटेल, विधायक परिणय फुके और पूर्व सांसद सुनील मेंढे जैसे दिग्गज नेता उनके साथ खड़े रहे।

भंडारा-गोंदिया जिले में 5 वर्तमान विधायक भी उपस्थित थे। हालांकि इस दौरान शिंदे गुट के स्थानीय विधायक नरेंद्र भोंडेकर की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही, फिर भी ब्राह्मणकर के सर्वमान्य चेहरे के कारण महायुति का पलड़ा फिलहाल भारी दिख रहा है। दूसरी ओर, महाविकास आघाड़ी के खेमे में शुरुआत में थोड़ी असमंजस की स्थिति थी, लेकिन आखिरी वक्त में कांग्रेस ने पूर्व विधायक दिलीप बंसोड का नामांकन पत्र दाखिल करवाकर सबको चौंका दिया।

निर्दलीय की उम्मीदवारी से समीकरण बदले

प्रफुल्ल अग्रवाल ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरकर इस चुनाव के समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे साल 1992 की उस सक्रिप्ट से जोड़कर देख रहे हैं, जब प्रफुल्ल अग्रवाल के पिता गोपालदास अग्रवाल ने निर्दलीय चुनाव जीतकर सबको हैरान कर दिया था।

दिलचस्प बात यह है कि बंसोड का पर्चा भरवाते समय पूर्व विधायक गोपालदास अग्रवाल मौजूद थे, जबकि प्रफुल्ल अग्रवाल के नामांकन के दौरान खुद प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले उपस्थित रहे। कांग्रेस की यह दोहरी चाल अंदरूनी रणनीति पर सवाल खड़े करती है, जिसका खुलासा अब एबी फॉर्म मिलने और नाम वापसी के बाद ही होगा।

संख्या बल में महायुति दिख रही भारी

इस निर्वाचन क्षेत्र में कुल 457 मतदाता है और संख्याबल के गणित के हिसाब से महायुति के पास महाविकास आघाडी की तुलना में करीब 100 वोट अधिक है। इसके अलावा चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने लाखांदुर नगर पंचायत के चार कांग्रेस पार्षदों को अपने पाले में लाकर आधाड़ी को बड़ा झटका दिया है। ब्राह्मणकर के सर्वसमावेशी चेहरे के चलते जहाँ महायुति के वोट बैंक में सेंध लगाना मुश्किल है, वहीं कांग्रेस की अंतर्कलह और उम्मीदवारी का सस्पेस आघाड़ी के लिए भारी पड़ सकता है।

यह चुनाव जहां भाजपा के लिए अपना प्रभाव बनाए रखने की चुनौती है, वहीं नाना पटोले और प्रफुल्ल पटेल जैसे दिग्गजों के लिए अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाए रखने की प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। अब देखना होगा कि प्रफुल्ल अग्रवाल की निर्दलीय एंट्री कोई मास्टरस्ट्रोक साबित होती है या भाजपा अपना किला बचाने में कामयाब रहती है।

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