Bhandara Municipal Council (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया) 
भंडारा

डस्टबिन हटाए तो लोगों ने खुद रखा ड्रम, भंडारा नगर परिषद की व्यवस्था पर सवाल

Dustbin Free City: भंडारा नगर परिषद के डस्टबिन मुक्त शहर अभियान की जमीनी हकीकत सामने आई है। डस्टबिन हटाने के बाद नागरिकों ने खुद सड़क किनारे ड्रम रखकर कचरा जमा करना शुरू कर दिया।

महाराष्ट्र डेस्क

Bhandara Municipal Council: भंडारा नगर परिषद प्रशासन भले ही शहर को डस्टबिन मुक्त बनाने के लिए बेताब है और इसलिए शहर से डस्टबिन हटाने के लिए प्रयास कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। शहर के नागरिक नगर परिषद की इस अव्यवहारिक व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। प्रशासन का सोचना है कि डस्टबिन हटाने से लोग सड़कों पर कचरा नहीं फेंकेंगे, जबकि नागरिकों की कार्यप्रणाली को देखें तो कचरा फेंकने की पुरानी व्यवस्था को बरकरार रखने पर तत्पर नजर आ रहे हैं।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण शहर के मुख्य पोस्ट ऑफिस चौक से मुस्लिम लाइब्रेरी की ओर जाने वाले मार्ग पर देखने को मिल रहा है। इस मार्ग पर नगर परिषद की ओर से डस्टबिन नहीं रखे जाने से नाराज होकर स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने खुद ही सड़क किनारे एक बड़ा ड्रम लाकर रख दिया है, ताकि पूरे इलाके का कचरा उसमें संग्रहित किया जा सके।

चेतावनी बोर्ड के नीचे कचरे का अंबार

जनता के इस कदम से साफ है कि वे कचरा फेंकने के लिए एक निश्चित और सुव्यवस्थित जगह चाहते हैं, जिसे प्रशासन समझने में नाकाम रहा है। चेतावनी बोर्ड के नीचे कचरे का ढेरहास्यास्पद बात यह है कि जिस स्थान पर लोगों ने यह ड्रम रखा है, ठीक उसी के ऊपर नगर परिषद की ओर से एक बड़ा सूचना फलक चेतावनी बोर्ड लगाया गया है। इस बोर्ड पर बकायदा लिखा है कि खुले में कचरा फेंकने वालों पर सख्त दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद लोग सरेआम और बेखौफ होकर इसी बोर्ड के नीचे खुले में कचरा फेंक रहे हैं।

भंडारा में स्वच्छता अभियान की खुली पोल

स्थानीय नागरिकों में न तो नगर परिषद की दंडात्मक कार्रवाई का कोई डर है और न ही भारी जुर्माने का। ज्ञातव्य हो कि इस मार्ग पर पिछले कई सालों से लगातार कचरा फेंका जा रहा है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। आश्चर्य की बात यह है कि आज तक प्रशासन की ओर से यहां गंदगी फैलाने वाले एक भी व्यक्ति पर कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण अब यह चेतावनी बोर्ड महज एक मजाक बनकर रह गया है।

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