Bhandara CMEGP: मुख्यमंत्री रोजगार निर्मिति योजना (सीएमईजीपी) के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिला उद्योग केंद्र को 1000 युवाओं को ऋण प्रदान करने का लक्ष्य सौंपा गया है। हालांकि, योजना की शुरुआत में अब तक केवल 65 आवेदकों के ऋण ही मंजूर हो सके हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 600 युवाओं को ऋण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन जिला उद्योग केंद्र इसे पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं कर पाया था।
ऋण वितरण की गति धीमी होने का मुख्य कारण बैंकों का कड़ा रवैया और प्रक्रियात्मक जटिलताएं हैं। बैंक ऋण स्वीकृत करने से पूर्व पुनर्भुगतान की क्षमता को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होना चाहते हैं। इसी वजह से चालू वर्ष में जिला उद्योग केंद्र की ओर से भेजे गए 468 आवेदनों में से बैंकों ने अब तक केवल 65 को ही मंजूरी दी है। यदि पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2025-26 में बैंकों को 1706 आवेदन भेजे गए थे। 600 युवाओं को ऋण देने का लक्ष्य था, जिनमें से 505 प्रकरणों में ऋण मंजूर हुआ और 84 प्रतिशत लक्ष्य ही हासिल हो सका था।
लक्ष्य साधन में नाकामयाब वर्ष 2022-23 में 222, 2023-24 में 451 तथा 2024-25 में 295 प्रकरण ही स्वीकृत हो पाए थे। ऐसे में इस वर्ष 1000 लोगों को ऋण का बढ़ा हुआ लक्ष्य कैसे पूरा होगा, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
पिछले वर्ष मंजूर प्रकरणों में सबसे अधिक मांग हार्वेस्टर मशीनों की रही, जिससे स्पष्ट होता है कि योजना का लाभ लेने वालों में किसानों की संख्या अधिक (123) है। इसके अतिरिक्त 31 लोगों ने ई-व्हीकल, 22 ने टेलरिंग, 21 ने सेंट्रिंग वर्क, 20 ने कारपेंटरी, 18 ने मंडप डेकोरेशन, 16 ने रेस्तरां, 11 ने नेट कैफे, 11 ने ब्यूटी पार्लर, 8 ने जेरॉक्स और 3 लोगों ने बेकरी व्यवसाय को प्राथमिकता दी।
मुख्यमंत्री रोजगार निर्मिति योजना के अंतर्गत विनिर्माण, कृषि तथा सेवा क्षेत्र से संबंधित परियोजनाएं पात्र हैं। इसमें विनिर्माण क्षेत्र के लिए अधिकतम परियोजना लागत 50 लाख रुपए तथा सेवा व कृषि आधारित उद्योगों के लिए 20 लाख रुपए निर्धारित है। शैक्षिक योग्यता के तहत 20 लाख रुपए से अधिक लागत की परियोजनाओं के लिए आवेदक का न्यूनतम सातवीं पास और 25 लाख रुपए से अधिक की परियोजनाओं के लिए दसवीं पास होना अनिवार्य है।
योजना के तहत राज्य सरकार की ओर से 15 से 35 प्रतिशत तक का आर्थिक अनुदान (सब्सिडी) प्रदान किया जाता है। कुल परियोजना लागत में लाभार्थी स्वयं का अंशदान 5 से 10 प्रतिशत, बैंक ऋण 60 से 80 प्रतिशत और सरकारी अनुदान 15 से 35 प्रतिशत रहता है।