बीड में सूखे से सोयाबीन की फसल बर्बाद होने की आशंका।
65 दिन से बारिश नहीं, चारा और पेयजल संकट गहराया।
केंद्रीय दल ने 15 स्थानों का दौरा कर किसानों से बात की।
Maharashtra Soybean Crop Loss Survey: खेतों में खड़ी सोयाबीन की फसल सूख गई है। कहीं फूल आने के समय बारिश नहीं होने से पौधों की वृद्धि रुक गई, तो कहीं तैयार होती फसल बर्बाद हो गई।
कुएं सूख रहे हैं, तालाबों में पानी तेजी से घट रहा है और पशुपालकों के सामने मवेशियों के चारे का संकट खड़ा हो गया है। मराठवाड़ा में सूखे की इस भयावह स्थिति का जायजा लेने पहुंचे केंद्रीय दल ने शनिवार को बीड जिले के 15 स्थानों का दौरा किया।
लगातार दूसरे दिन खेतों, जलस्रोतों और पेयजल व्यवस्था की स्थिति देखने के साथ दल ने किसानों से सीधे बातचीत की। किसानों ने फसल नुकसान के अनुपात में आर्थिक सहायता, फलोद्यानों को बचाने के लिए अनुदान और पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने की मांग की।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव तथा दल प्रमुख मुक्तानंद अग्रवाल के नेतृत्व में यह दौरा किया गया। राज्य के कृषि सचिव परिमल सिंह, महालनोबिस राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र के उपनिदेशक सुनील कुमार दुबे, बीड जिले के जिलाधिकारी डॉ। विवेक जॉन्सन और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितिन रहमान सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
बीड तहसील के मोरगांव में किसान बाबासाहेब चोखामार के दो एकड़ खेत में सोयाबीन की फसल का निरीक्षण किया गया। सामान्य परिस्थितियों में प्रति एकड़ सात से आठ क्विंटल उत्पादन होने की उम्मीद रहती है, लेकिन इस बार एकड़ में मुश्किल से 50 किलो सोयाबीन मिलने की आशंका जताई गई। फूल आने के समय बारिश नहीं होने से फसल की वृद्धि रुक गई।
गांव के करीब 1,400 किसानों में से लगभग 70 प्रतिशत किसानों की फसलों को 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने की जानकारी दल को दी गई। खंडाला में किसानों ने सूखे कुओं और तीन फुट तक भी नहीं बढ़ पाए सोयाबीन के पौधों की समस्या बताई। दल ने फसल नुकसान के आकलन, तस्वीरों और दर्ज आंकड़ों की भी पड़ताल की।
बीड जिले के पाटोदा तहसील के वैद्यकिन्ही और सोनेगांव में पिछले 65 दिनों से बारिश नहीं होने का असर खेती और जलापूर्ति पर दिखाई दिया। वैद्यकिन्ही में किसान देवीदास भानदास के दो हेक्टेयर खेत में सोयाबीन की फसल का निरीक्षण किया गया। किसानों ने बताया कि लगातार दूसरे वर्ष उन्हें फसल नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
गांव के लगभग 1,100 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में से 950 हेक्टेयर पर सोयाबीन की खेती होती है। चारे का मूल्य चार हजार रुपये प्रति टन तक पहुंचने और कुओं से सीमित समय तक पानी मिलने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है।
सोनेगांव में सोयाबीन, अरहर, अनार, मौसंबी और अंगूर के बागों पर भी पानी की कमी का असर पड़ा है। किसान अशोक चौरे ने फसलों के लिए प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये और फलोद्यानों के लिए दो लाख रुपये सहायता देने की मांग की।
दाशखेड में खेत में सोयाबीन सुखा रहीं रेखा जयंत कोकाटे से दल ने बातचीत की। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 30 बोरी सोयाबीन हुआ था, जबकि इस बार डेढ़ से दो एकड़ में केवल 40 किलो उत्पादन मिलने की आशंका है।
किसान सुधाकर नवनाथ ठोंबरे ने तीन एकड़ में सोयाबीन की खेती पर 54 हजार रुपये खर्च किए, लेकिन अब डेढ़ से दो क्विंटल उत्पादन की उम्मीद है। इससे लगभग नौ से दस हजार रुपये की आमदनी होने का अनुमान है। किसान बबनराव ठोंबरे के ढाई एकड़ खेत में भी केवल 60 से 70 किलो सोयाबीन मिलने की आशंका जताई गई।
वैजाला में प्याज उत्पादक बंकट येडे ने बताया कि पानी की कमी के कारण उन्हें प्याज की खेती दस एकड़ से घटाकर एक एकड़ करनी पड़ी। गेंदे के फूलों का आकार छोटा होने और मक्के की वृद्धि प्रभावित होने की जानकारी भी किसानों ने दी।
बेडूकवाडी में पशुपालक किसान वैभव शिंदे और अंकुश शिंदे ने बताया कि घर में उपलब्ध ज्वार का चारा और नेपियर घास मुश्किल से 15 दिन तक चलेगी। बाहर से चारा खरीदने पर 11 हजार रुपये प्रति टन तक खर्च आ रहा है।
प्रतिदिन करीब 130 लीटर दूध का उत्पादन करने वाले इन किसानों ने चारा समाप्त होने पर पशुधन बचाने के लिए सरकारी सहायता और चारा केंद्र शुरू करने की मांग की।
बीड शहर के बिंदुसरा तालाब में उपयोगी जल भंडार 30 जून के 17 प्रतिशत से घटकर पांच प्रतिशत रह गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में तालाब पूरी तरह भरा था। शहर को प्रतिदिन लगभग 38 लाख लीटर पानी की जरूरत है।
इसमें से 28 लाख लीटर पानी माजलगांव बांध से मिलता है, जबकि शेष जरूरत के लिए बिंदुसरा तालाब पर निर्भर रहना पड़ता है। मोरगांव की दराडे बस्ती स्थित तालाब में पानी पूरी तरह समाप्त हो चुका है। ग्रामीणों ने जल जीवन मिशन के तहत पेयजल योजना का काम चार से पांच वर्षों से लंबित होने की शिकायत भी की।
दौरे के बाद जिलाधिकारी कार्यालय में हुई बैठक में फसल नुकसान, भूजल स्तर, पेयजल उपलब्धता, चारे की स्थिति और किसानों को सहायता वितरण की समीक्षा की गई। किसानों को उम्मीद है कि केंद्रीय दल की प्रत्यक्ष पड़ताल के आधार पर केंद्र सरकार से सूखा राहत के लिए पर्याप्त सहायता मिलेगी।