Sandipan Bhumre vs Ambadas Danve: महाराष्ट्र की राजनीति में आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर तेज हो गया है। शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद संदीपान भुमरे ने शिवसेना (UBT) नेता अंबादास दानवे द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों पर पलटवार किया है। भुमरे ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं और वे अंबादास दानवे के खिलाफ मानहानि का दीवानी और फौजदारी मुकदमा दायर करने जा रहे हैं।
विवाद की शुरुआत मंगलवार को हुई जब महाराष्ट्र विधान परिषद के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि संदीपान भुमरे के ड्राइवर जावेद शेख को जटवाड़ा क्षेत्र में 23 एकड़ जमीन 'उपहार' (हिबानामा) के रूप में दी गई है। दानवे के अनुसार, इस जमीन की वर्तमान बाजार कीमत लगभग 1,150 करोड़ रुपये है। उन्होंने सवाल उठाया था कि एक हिंदू मालिक ने मुस्लिम ड्राइवर को 'हिबानामा' के जरिए जमीन कैसे दी, वह भी ड्राइवर के पैदा होने से 14 साल पहले?
सांसद संदीपान भुमरे ने बुधवार को पलटवार करते हुए कहा कि अंबादास दानवे के आरोप अधूरी जानकारी और हताशा पर आधारित हैं। मुझे और मेरे ड्राइवर को इस जमीन के असली मालिक के बारे में कोई जानकारी नहीं है। दानवे जिस 'गट नंबर' (सर्वेक्षण संख्या) 174 का जिक्र कर रहे हैं, उस क्षेत्र में वह अस्तित्व में ही नहीं है। वहां केवल 171 तक ही गट नंबर हैं।
भुमरे ने तकनीकी विसंगतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके ड्राइवर का जन्म 1984-85 में हुआ है, जबकि दानवे जिस दस्तावेज (हिबानामा) का दावा कर रहे हैं, वह 1971 का है। भुमरे ने तंज कसते हुए पूछा कि जो व्यक्ति पैदा ही नहीं हुआ था, उसके नाम पर 14 साल पहले दान विलेख कैसे बन सकता है? यह पूरी तरह से फर्जी कहानी है।
यह भी पढ़ें:- ‘नवभारत’ लेकर आया मानकापुर स्पोर्ट्स हब का पूरा मास्टर प्लान, देखें खेलों की नई नगरी की पहली झलक
भुमरे ने इस मामले में सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग की संभावना को भी खारिज नहीं किया और मांग की कि इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 1,150 करोड़ का आंकड़ा कहां से आया? इसका कोई आधिकारिक आधार नहीं है। दानवे सिर्फ मेरी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। मैंने अपने कानूनी सलाहकारों से बात की है और जल्द ही उन पर मानहानि का दावा ठोकूंगा।
इस जुबानी जंग ने आगामी चुनावों से पहले छत्रपति संभाजीनगर की राजनीति में गर्माहट पैदा कर दी है। अब देखना यह होगा कि क्या अंबादास दानवे अपने दावों के समर्थन में पुख्ता सबूत पेश कर पाते हैं या नहीं।