Chhatrapati Sambhajinagar Municipal Corporation Tax Dispute: छत्रपति संभाजीनगर मनपा इस समय एक गंभीर विरोधाभास का सामना कर रही है। एक ओर प्रशासन आर्थिक तंगी का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक उदासीनता और कानूनी विवादों के कारण करोड़ों रुपये का राजस्व अटका हुआ है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, सरकारी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों और अदालती मामलों के कारण 45.93 करोड़ रुपये से अधिक की कर राशि की वसूली रुकी हुई है। इस वित्तीय बाधा का सीधा असर शहर के विकास कार्यों और आवश्यक बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं पर पड़ रहा है।
पिछले वित्तीय वर्ष में मनपा ने विभिन्न स्रोतों से 400 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व जुटाया था, लेकिन इसके बावजूद बकाया राशि का आंकड़ा कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष के लिए मनपा की कर मांग 165 करोड़ रुपये है, जबकि संचयी बकाया राशि अब बढ़कर 1,279 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है।
राजस्व वसूली में एक बड़ी बाधा लंबित कानूनी मामले हैं। वर्तमान में विभिन्न संपत्ति धारकों द्वारा दायर 126 मामले न्यायालय में लंबित हैं, जिनमें लगभग 26.17 करोड़ रुपये का कर फंसा हुआ है। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के कारण इस राशि की तत्काल वसूली संभव नहीं हो पा रही है। हाल ही में स्थायी समिति के सभापति अनिल मकरिये की अध्यक्षता में हुई विशेष बैठक में यह खुलासा हुआ कि सरकारी और निजी संपत्तियों के इन विवादों के कारण अपेक्षित राजस्व प्राप्त नहीं हो पा रहा है।
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चौंकाने वाली बात यह है कि राजस्व का एक बड़ा हिस्सा प्रतिष्ठित सरकारी विभागों और शैक्षणिक संस्थानों के पास बकाया है। सरकारी विभाग पर कुल 19.76 करोड़ रुपये की देनदारी है। इनमें पुलिस विभाग (6.64 करोड़), रेलवे (5.89 करोड़), बीएसएनएल (4.51 करोड़), विद्युत मंडल (1.38 करोड़) और जिला अस्पताल चिकलथाना (1.34 करोड़) प्रमुख हैं।
विभिन्न शैक्षणिक संस्थान संस्थानों पर कुल 12.62 करोड़ रुपये का कर बकाया है। इसमें एमआईटी कॉलेज (5.30 करोड़), भगवान शिक्षण प्रसारक मंडल (3.58 करोड़), अजंठा शिक्षण संस्था (1.73 करोड़) और फ्रान्सलियन स्कूल (63.18 लाख) शामिल हैं।
छत्रपति संभाजीनगर शहर के विकास को गति देने के लिए अब यह अनिवार्य हो गया है कि मनपा प्रशासन इन बकाया राशियों की वसूली के लिए सख्त और प्रभावी कदम उठाए।