सिलेंडर की किल्लत की प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया) 
औरंगाबाद

Chhatrapati Sambhajinagar Gas Crisis: गैस सिलेंडर की आपूर्ति में सुधार, सप्लाई सुधरी, पर परेशानी बरकरार

LPG Gas Crisis: छत्रपति संभाजीनगर में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की वेटिंग 11 हजार से घटकर 7 हजार पर आई। जानें क्यों लग रहा है 10 दिन का समय और क्या है 25 दिन का नया बुकिंग नियम।

गोरक्ष पोफली

LPG Cylinder Waiting List: शहर में घरेलू गैस (LPG) सिलेंडर की किल्लत से जूझ रहे उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर तो है, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण चरमराई वैश्विक सप्लाई चेन अब धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है, जिससे गैस बुकिंग की लंबी वेटिंग लिस्ट में कमी आई है। हालांकि, ग्राहकों को अभी भी अपने रिफिल के लिए हफ्तों का इंतजार करना पड़ रहा है।

वेटिंग लिस्ट में गिरावट, पर सामान्य स्थिति से अब भी दूर

युद्ध के चरम समय के दौरान, शहर में गैस बुकिंग की वेटिंग 10,000 से 11,000 के पार पहुंच गई थी। वर्तमान में यह आंकड़ा गिरकर 4,000 से 7,000 के बीच आ गया है। भले ही प्रशासन इसे सुधार मान रहा हो, लेकिन युद्ध पूर्व की स्थिति (जब वेटिंग केवल 1,000 से 2,500 रहती थी) की तुलना में यह अभी भी दो से तीन गुना अधिक है।

25 दिन का नियम और जमाखोरी पर लगाम

सरकार ने गैस की कालाबाजारी और पैनिक बुकिंग को रोकने के लिए एक सख्त कदम उठाया है। शहरी क्षेत्रों में दो रिफिल बुकिंग के बीच की न्यूनतम समय सीमा को बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपलब्ध स्टॉक का समान वितरण हो सके, लेकिन उन परिवारों के लिए यह मुसीबत बन गया है जिनकी गैस खपत अधिक है।

प्रमुख एजेंसियों का पक्ष

विभिन्न गैस कंपनियों के संचालकों ने स्थिति पर संतोष व्यक्त किया है:

  • भारत गैस (मंगेश आस्वार): उनका कहना है कि पैनिक बुकिंग अब कम हो गई है और आने वाले दिनों में वेटिंग पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
  • एचपी गैस (व्यंकटेश काकड़े): उन्होंने दावा किया कि सप्लाई चेन अब नियंत्रण में है और ग्राहकों को पहले की तुलना में तेजी से सिलेंडर मिल रहे हैं।

गृहिणियों की बढ़ी मुश्किलें

गैस समय पर न मिलने का सबसे सीधा असर रसोई पर पड़ा है। कई इलाकों में सिलेंडर आने में 8 से 10 दिन का समय लग रहा है, जिसके कारण गृहिणियों को वैकल्पिक साधनों जैसे इंडक्शन चूल्हे, इलेक्ट्रिक हीटर या अन्य ईंधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे परिवारों के बजट पर अतिरिक्त बिजली बिल का बोझ भी बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वेटिंग पुराने स्तर (1,000-2,000) पर नहीं आती, तब तक उपभोक्ताओं को पूर्ण राहत मिलना मुश्किल है। प्रशासन भले ही आपूर्ति सामान्य होने का दावा करे, लेकिन आम जनता के लिए 'अच्छे दिन' अभी कुछ और दिन दूर हैं।

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