Jalna Kundalika River Project (सोर्स: AI)  
औरंगाबाद

जालना में सीवेज ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट अधूरा, कुंडलिका नदी में खुले पाइप व गहरे गड्डों से बढ़ रहा है खतरा

Jalna Kundalika River Project: जालना में 94 करोड़ खर्च के बाद भी कुंडलिका नदी सुधार परियोजना अधूरी है। खुले गड्ढों और असुरक्षित पाइपलाइन के कारण अब तक 3 लोगों की जान जा चुकी है, प्रशासन अब भी मौन है।

रूपम सिंह

Jalna Municipal Corporation News: जालना शहर के घर से निकलने वाले गंदे पानी का उपचार किया जाए व कुंडलिका नदी को स्वच्छ रखने के उद्देश्य से रोहनवाड़ी पुल के पास सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) व पाइप लाइन परियोजना शुरू की गई थी। हकीकत यह है कि 94 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद यह परियोजना अब तक पूरी नहीं होने से शहरवासियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राउंड रिपोर्ट में पता चला कि नदी के तल में कई स्थानों पर पाइप खुले पड़े हैं।

कुछ जगह सीमेंट की पाइप लाइन क्षतिग्रस्त है। कई अधूरे गड्डों में पानी भर गया है व उनमें जलकुंभी उग आई है। ये गड्ढे अब खतरनाक बन चुके हैं और इनमें गिरने से अब तक तीन लोगों की जीवनज्योति बुझ गई है। परियोजना के तहत नदी के किनारे कई स्थानों पर खुदाई कर पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू किया गया था, जो अधूरा छोड़ दिया गया।

इन स्थानों पर न तो सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं और न ही चेतावनी फलक लगाए गए हैं, जिससे यह अधूरा पाइपलाइन प्रोजेक्ट अब स्थानीय लोगों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। कुंडलिका नदी के किनारे बड़ी संख्या में मकान होने के चलते लोग अक्सर नदी के तल में आते-जाते रहते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।

नदी के तल में बने खुले गड्डों में गिरकर तीन लोगों की मौत होने के बावजूद अब तक प्रशासन या ठेकेदार की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सुरक्षा के बुनियादी उपाय नहीं किए जाने से हादसों को खुला निमंत्रण मिल रहा है। जानकारी के अनुसार ये गड्ढे अब खतरनाक बन चुके हैं और इनमें गिरने से अब तक तीन लोगों की जीवनज्योति बुझ गई है।

ठेकेदार के बिल अभी भी लंबित

इस परियोजना के लिए राज्य सरकार व जालना मनपा को मिलकर 16 करोड़ रुपए का योगदान देना था, पर मनपा के अब तक यह राशि जमा नहीं करने से ठेकेदार के कुछ बिल भी लंबित बताए जा रहे हैं। परियोजना का बड़ा हिस्सा अधूरा होने के बावजूद ठेकेदार को अब तक 108 करोड़ रुपये में से 94 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। मनपा की कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि यदि 16 करोड़ रुपए की हिस्सेदारी जमा नहीं की गई, तो यह परियोजना लंबे समय तक अधूरी रह सकती है।

बिल लंबित होने से काम की गति धीमी

जलापूर्ति विभाग राजेश बागले ने बताया की परियोजना का करीब 95 प्रश काम पूरा हो चुका है और महज कुछ पाइप लाइन का कार्य बाकी है। ठेकेदार को सुरक्षा संबंधी निर्देश दिए गए है। नियुक्त समिति समय-समय पर निरीक्षण भी करती है। कुछ बिल लंबित होने से काम की गति धीमी है।

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