Chhatrapati Sambhajinagar Jadhavwadi APMC Tax Dispute: छत्रपति संभाजीनगर जाधववाड़ी कृषि उपज बाजार समिति के सेल हॉल परिसर की खुली जगह पर कर वसुली के निर्णय का व्यापारियों ने विरोध किया है। हाल ही में आयोजित प्रारंभिक बैठक में ही व्यापारियों ने नियमों का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को अस्वीकार्य बताया था।
वर्ष 1998 में बाजार समिति ने 90 व्यापारियों के साथ किए गए लीज समझौते में सेल हॉल के दुकानों के सामने की खुली जगह को किसानों व व्यापारियों को मुफ्त उपयोग के लिए उपलब्ध कराया था। इस स्थान का उपयोग किसानों के माल को उतारने, नीलामी करने व खरीदे गए माल को रखने के लिए किया जाता है।
किसानों के माल को वारिश व धूप से बचाने के लिए यहां बाजार समिति प्रशासन ने लाइट फिटिंग व टिन शेड भी लगाया है। लेकिन, उपयोग जारी होने का हवाला देते हुए मनपा ने इस जगह पर भी संपत्ति कर लगा दिया।
अब बाजार समिति यह टैक्स व्यापारियों से वसूल करने की कोशिश कर रही है, इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए सभापति श्रीराम शेलके की अध्यक्षता में बैठक बुलाई गई थी।
जिसमें संचालक कन्हैयालाल जैस्वाल, नीलेश सेठी, व्यापारी संघ के हरीश पवार, राकेश जैन, दिलीप सावजी, विक्रम सावजी, अंकुश दायमा, संजय पहाड़े व कृष्णा पारीख सहित कई व्यापारी मौजूद थे।
छत्रपति शिवाजी महाराज बाजार संकुल में कृषि उपज व अनाज की खरीद-बिक्री के लिए पांच सेल हॉल हैं, जिनमें 800, 400 व 200 वर्ग फुट के 150 से अधिक की दुकाने है। प्रत्येक हॉल में लगभग 20 से 22 हजार वर्ग फुट खुली जगह है, जो कुल मिलाकर एक लाख वर्ग फुट से अधिक होती है। व्यापारियों के अनुसार हॉल नंबर 2 को छोड़कर 1, 3, 4 व 5 की खुली जगह का कर उनसे वसूलने का प्रयास किया जा रहा है।
व्यापारी प्रतिनिधिमंडल को पहले मनपा आयुक्त जी. श्रीकांत ने इस खुली जगह पर लगाए गए टैक्स को माफ करने का आश्वासन दिया था। व्यापारियों का कहना है कि बाजार समिति को इस विषय पर मनपा के पास लगातार प्रयास करना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि एक दुकान धारक से मनपा की ओर से संपत्ति व अन्य सेवा शुल्क मिलाकर लगभग 9 हजार रूपये वसूले जाते है, जबकि बाजार समिति भी सेवा शुल्क, लीज प्रीमियम व अकृषिक टैक्स के नाम पर 5,600 रुपये लेती है।
यह भी पढ़ें:-शहर में बढ़ीं छिनैती की वारदातें, बाइक सवार बदमाशों ने विश्वभारती कॉलोनी में महिला से सोने की चेन लूटी
ऐसे में मुफ्त उपयोग पर अतिरिक्त कर वसूलना उचित नहीं है। वहीं सभापति शेलके ने कहा कि वर्ष 1998 से मनपा ने लगाए इस कर की वसूली बाजार समिति के माध्यम से की जा रही है। समिति को आय प्राप्त होना अपेक्षित है, इसलिए व्यापारियों से खुली जगह का कर भरने की अपेक्षा है। बैठक में व उचित निर्णय लिया जाएगा।