Ramai Awas Ghotala Sambhajinagar News: छत्रपति संभाजीनगर की राजनीति में रमाई आवास योजना को लेकर लगा भ्रष्टाचार का आरोप अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सनसनीखेज दावा करते हुए इस कथित घोटाले के तार सीधे भाजपा के कैबिनेट मंत्री अतुल सावे से जोड़ दिए हैं। जलील का आरोप है कि संभाजीनगर नगर निगम में गरीबों के लिए बनी इस आवास योजना में जो करोड़ों की हेराफेरी हुई, वह मंत्री सावे के सीधे आदेश और संरक्षण में की गई है।
यह विवाद तब और गहरा गया जब नगर निगम प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ मुहिम में बाधा डालने के आरोप में एमआईएम के 13 पार्षदों को पद से हटाने का नोटिस जारी किया। इस कार्रवाई से बिफरे इम्तियाज जलील ने जवाबी हमला करते हुए सत्ताधारी गठबंधन के 'घोटालों' की पोल खोलने की चेतावनी दी थी। जलील के अनुसार, नगर निगम आयुक्त को इस घोटाले के लिए मजबूर करने वाले व्यक्ति खुद अतुल सावे थे। इस आरोप ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है क्योंकि सावे राज्य सरकार में ओबीसी कल्याण मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर हैं।
इम्तियाज जलील ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन पूर्व पार्षदों के नामों की सूची सार्वजनिक की, जिन्होंने कथित तौर पर इस योजना में सेंध लगाई। उन्होंने आरोप लगाया कि महेंद्र सोनवणे ने 700 और अरुण बोर्डे ने 300 बोगस मामले तैयार किए। इसके अलावा, उन्होंने जालिंदर शेंडगे (बीजेपी), अमित भुईगल (वंचित) और रूपचंद वाघमारे जैसे नेताओं पर भी फर्जी लाभार्थी दिखाकर सरकारी निधि लूटने का आरोप लगाया। जलील ने सवाल उठाया कि जब नियमों के अनुसार निविदाएं (Tenders) कम रेट पर होनी चाहिए थीं, तो मंत्री के आशीर्वाद से एक एजेंसी को 90 प्रतिशत कम दर पर कॉन्ट्रैक्ट कैसे दिया गया?
मंत्री अतुल सावे ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे इम्तियाज जलील की 'पब्लिसिटी स्टंट' करार दिया है। सावे ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जलील एक "कॉम्प्रोमाइज" करने वाले नेता हैं और केवल चर्चा में रहने के लिए आधारहीन आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने जलील को चुनौती दी कि वे केवल हवा में बातें न करें बल्कि इन आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करें। सावे ने याद दिलाया कि जलील ने पहले भी गुटखा और शराब के खिलाफ आंदोलन शुरू किए थे, लेकिन बाद में उन्हें बीच में ही छोड़ दिया।
छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम में एमआईएम के 57 पार्षदों की जीत के बाद से ही शिवसेना-भाजपा गठबंधन और एमआईएम के बीच तनाव बना हुआ है। एमआईएम का आरोप है कि प्रशासन सत्ता पक्ष के इशारे पर उनके पार्षदों को निशाना बना रहा है। जलील ने चेतावनी दी है कि यदि उनके एक भी पार्षद पर कार्रवाई हुई, तो वे निगम के अधिकारियों के भ्रष्टाचार के सारे सबूत सार्वजनिक कर देंगे। फिलहाल, जलील ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की है।