भाजपा अध्यक्ष किशोर शितोले ने अभिजीत दीपके को घेरा(फोटो सोर्स-सोशल मीडिया) 
औरंगाबाद

हिंसा पर राजनीति नहीं, दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई, संभाजीनगर भाजपा शहराध्यक्ष शितोले ने अभिजीत दीपके को घेरा

BJP vs Abhijeet Dipke: दिल्ली आंदोलन हिंसा पर CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के बयानों पर BJP ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संभाजीनगर भाजपा अध्यक्ष किशोर शितोले ने कानून के सम्मान की नसीहत दी।

अंकिता पटेल

Delhi Movement Violence: दिल्ली में हुए आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कॉक्रोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा के छत्रपति संभाजीनगर शहर जिलाध्यक्ष किशोर शितोले ने कहा कि यदि आंदोलन के दौरान पथराव हुआ है और दिल्ली पुलिस आरोपियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई कर रही है, तो उसका विरोध करने के बजाय कानून का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि तथ्यों के बजाय भ्रामक बयान देकर जनता को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है।

कानून का सम्मान करने की नसीहत

किशोर शितोले ने कहा कि संविधान की बात करने वाले लोगों को सबसे पहले कानून के शासन पर विश्वास दिखाना चाहिए। यदि किसी ने हिंसा, पथराव या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, तो उसके खिलाफ निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई की मांग की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बयानबाजी के माध्यम से हिंसक घटनाओं को अलग दिशा देने का प्रयास उचित नहीं है।

अन्य राज्यों के मामलों पर भी मांगा जवाब

भाजपा शहर जिलाध्यक्ष ने अभिजीत दीपके से यह भी पूछा कि यदि वे परीक्षा घोटालों और पेपर लीक के मामलों को लेकर गंभीर हैं, तो कर्नाटक और पंजाब में सामने आए कथित पेपर लीक प्रकरणों पर संबंधित मंत्रियों के इस्तीफे की मांग कब करेंगे। उन्होंने कहा कि केवल चुनिंदा घटनाओं पर राजनीतिक प्रतिक्रिया देना दोहरे मापदंड को दर्शाता है।

आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं पर स्पष्ट करें रुख

शितोले ने कहा कि आंदोलन के दौरान हुई नारेबाजी, अभद्र भाषा के इस्तेमाल तथा उसके बाद कथित रूप से किए गए जश्न को लेकर भी अभिजीत दीपके को अपना स्पष्ट पक्ष सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोगों से जिम्मेदार आचरण और संतुलित वक्तव्य की अपेक्षा की जाती है।

भाजपा ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान पुलिसकर्मियों और पत्रकारों पर हुए हमले, पथराव और हिंसक घटनाएं अत्यंत गंभीर हैं। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई का समर्थन करने के बजाय यदि कोई उनके पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास करता है, तो इससे गलत संदेश जाता है। शितोले ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और हिंसा के किसी भी रूप का समर्थन नहीं किया जा सकता।

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