मृत व्यक्ति ने बेचे 7 करोड़ के फ्लैट (सोर्स: एआई फोटो) 
औरंगाबाद

मृत व्यक्ति ने बेचे 7 करोड़ के फ्लैट! संभाजीनगर में पावर ऑफ अटॉर्नी का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

Chhatrapati Sambhajinagar News: छत्रपति संभाजीनगर में मृत व्यक्ति की पावर ऑफ अटॉर्नी से करोड़ों का फ्लैट घोटाला। जानें कैसे आरोपियों ने बिल्डर और पुलिसकर्मियों को ठगा।

गोरक्ष पोफली

Chhatrapati Sambhajinagar Real Estate Fraud: महाराष्ट्र के रियल एस्टेट क्षेत्र में धोखाधड़ी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक और कानूनी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। एक मृत व्यक्ति के दस्तावेजों का सहारा लेकर और जाली हस्ताक्षर के जरिए करीब 11 करोड़ रुपये के गबन का खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने जालगांव और सातारा क्षेत्र के रहने वाले तीन आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।

मरे हुए व्यक्ति ने दी पावर ऑफ अटॉर्नी?

पुलिस जांच में जो सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया, वह यह है कि आरोपियों ने एक ऐसे व्यक्ति के नाम पर 'पावर ऑफ अटॉर्नी' (Power of Attorney) को वैध बताकर सौदा किया, जिसकी मृत्यु वर्ष 2010 में ही हो चुकी थी। यह पूरा खेल नवंबर 2020 से अप्रैल 2026 के बीच सातारा क्षेत्र में खेला गया। नासिक निवासी सौरभ सूर्यकांत आहिरे (संचालक, "उज्ज्वल" फर्म) की शिकायत पर प्रदीप मधुकर पाटिल, प्रमोद मधुकर पाटिल और लौकिक प्रमोद पाटिल के खिलाफ सातारा पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है।

जाली हस्ताक्षर और फ्लैटों की अवैध बिक्री

आरोपियों ने हाउसिंग सोसायटी के फर्जी पदाधिकारी बनकर 18 अधूरे भवनों को पूरा करने का झांसा देकर बिल्डर से करीब 2 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। इसके बाद उन्होंने खुद को सर्वेसर्वा बताकर तैयार इमारतों के फ्लैट्स को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेच दिया और करीब 7 करोड़ रुपये वसूल किए। निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद आरोपियों ने बिल्डर को कोई भुगतान नहीं किया, जिससे उसे सीधे तौर पर 4.11 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। असली पदाधिकारियों के जाली हस्ताक्षर कर दस्तावेज तैयार किए गए, जिन्हें बाद में वास्तविक पदाधिकारियों ने पहचानने से इनकार कर दिया।

पुलिस और सरकारी कर्मचारी भी बने शिकार

इस घोटाले की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें करीब 100 से अधिक सरकारी कर्मचारी और 15 से 20 पुलिस कर्मी भी फंस गए हैं। इन लोगों ने अपने सपनों के घर के लिए जीवन भर की जमा पूंजी जमा की, लेकिन उन्हें आज तक फ्लैट का कब्जा नहीं मिला। जांच में पता चला है कि करीब 10 सोसायटियों का ऑडिट तक नहीं कराया गया और मनमाने तरीके से चुनाव कराकर अपने करीबियों को पदों पर बैठाया गया।

संगठित आर्थिक अपराध के रूप में जांच शुरू

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह एक संगठित आर्थिक अपराध है। बैंक लेनदेन और फर्जी करारनामों की गहन जांच की जा रही है। कई लोग अपनी सरकारी नौकरी के कारण सामने आकर शिकायत दर्ज कराने से बच रहे थे, लेकिन अब पुलिस ने पीड़ितों से अपील की है कि वे जांच में सहयोग करें। पुलिस अब उन बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया में है जिनके माध्यम से इन करोड़ों रुपयों का लेनदेन किया गया था।

DUSU Election 2026 LIVE: दिल्ली यूनिवर्सिटी में वोटिंग शुरू, 2.75 लाख छात्र चुन रहे नया छात्र संघ

Passport Rules Changed: 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए पासपोर्ट वैधता और फीस दोनों बदले, जाने नया नियम

खत्म हो रहा है PM मोदी का राजयोग? संजय राउत ने दिया ज्योतिष शास्त्र का हवाला, बोले- ग्रह छुट्टी पर नहीं जाते

IndiGo से सफर हुआ महंगा: गोद में बच्चे को बैठाने से ज्यादा सामान ले जाने तक, एयरलाइन ने बढ़ा दिए ये चार्जेस

कांग्रेस सांसद का पत्र मिलते ही 5 मिनट में आया गडकरी का फोन, तुरंत दिए कार्रवाई के निर्देश