Sambhajinagar 2740 Cr. Water Scheme Report: शहर को नियमित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की जा रही 2740 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी जलापूर्ति योजना अब गंभीर विवादों और तकनीकी खामियों के कारण मुश्किलों में घिरती दिखाई दे रही है।
पहली ही बारिश में जलशुद्धीकरण केंद्र में आई खराबी से योजना की गुणवत्ता पर सवाल उठ गए हैं, वहीं उप अभियंता के निलंबन के बाद महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के अधिकारियों और निर्माण कंपनी के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि परियोजना के शेष कार्यों और शहर में नियमित जलापूर्ति शुरू होने की समय सीमा पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार 12 जून से नई योजना के माध्यम से शहर को पानी मिलना शुरू होना था, लेकिन निर्धारित समय पर यह संभव नहीं हो सका। करीब एक सप्ताह की देरी के बाद 30 से 40 एमएलडी पानी की आपूर्ति शुरू की गई, जिसे बाद में बढ़ाकर लगभग 50 एमएलडी तक पहुंचाया गया। लेकिन पहली ही तेज बारिश में नक्षत्रवाड़ी स्थित जलशुद्धीकरण केंद्र की छत से पानी टपकने लगा।
इसके कारण विद्युत पैनलों में खराबी आ गई और पूरी पंपिंग व्यवस्था ठप हो गई। मरम्मत पूरी होने के बावजूद लगातार हो रही बारिश के कारण पंपिंग दोबारा शुरू नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप पिछले कई दिनों से नई योजना से शहर को पानी नहीं मिल पाया है।
इसी बीच महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की उप अभियंता पूजा जाधव के निलंबन के आदेश जारी होने के बाद विभाग के अधिकारियों में असंतोष फैल गया है। अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य में देरी और तकनीकी कमियों के लिए जिम्मेदार ठेकेदार कंपनी पर कार्रवाई करने के बजाय विभागीय अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है।
उनका आरोप है कि निर्माण एजेंसी समय पर कार्य पूरा नहीं कर रही, फिर भी जवाबदेही अधिकारियों पर डाली जा रही है। इस घटनाक्रम के बाद परियोजना से जुड़े अधिकारियों और ठेकेदार कंपनी के बीच विवाद खुलकर सामने आ गया है।
महापौर समीर राजूरकर ने कहा कि शहर को अब तक 200 एमएलडी पानी मिलना शुरू हो जाना चाहिए था। कुछ दिनों तक 50 एमएलडी तक पानी की आपूर्ति हुई, लेकिन वह भी बंद हो गई है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि नियमित जलापूर्ति कब शुरू होगी, परियोजना के कौन-कौन से कार्य अभी शेष हैं और उन्हें पूरा करने की समयसीमा क्या है, इसकी कोई अधिकृत जानकारी महानगरपालिका को नहीं दी गई है।
उन्होंने कहा कि पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी जाएगी, ताकि परियोजना में आ रही बाधाओं और जिम्मेदार पक्षों की जवाबदेही तय की जा सके।
महानगरपालिका का कहना है कि 200 एमएलडी क्षमता वाली इस परियोजना की वर्तमान स्थिति को लेकर उसे कोई आधिकारिक रोडमैप उपलब्ध नहीं कराया गया है। कौन-से कार्य अधूरे हैं, उन्हें कब तक पूरा किया जाएगा और नियमित जलापूर्ति किस तारीख से शुरू होगी, इस संबंध में स्पष्ट जानकारी न मिलने से प्रशासन भी असमंजस की स्थिति में है।
करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रही इस परियोजना में पहली ही बारिश के दौरान जलशुद्धीकरण केंद्र की छत से रिसाव होना, बिजली प्रणाली का ठप पड़ जाना और मरम्मत के बाद भी जलापूर्ति बहाल नहीं हो पाना निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
अब मांग उठ रही है कि पूरे प्रकल्प का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण कराया जाए और निर्माण में यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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तकनीकी खामियों, प्रशासनिक विवाद और जलापूर्ति में लगातार हो रही देरी के बीच अब शहरवासियों की निगाहें राज्य सरकार पर टिक गई हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री स्तर पर हस्तक्षेप के बाद ही परियोजना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और शहर को नियमित जलापूर्ति शुरू करने के लिए ठोस निर्णय लिए जा सकेंगे। फिलहाल 2740 करोड़ रुपये की यह महत्वाकांक्षी योजना अपने सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है।
– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट