निदा खान मामले में हनीफ खान के घर चला बुलडोजर (फोटो क्रेडिट-X)  
औरंगाबाद

निदा खान केस में बड़ा ट्विस्ट: AIMIM पार्षद मतीन पटेल के चक्कर में गरीब मिस्त्री के नए घर पर चला दिया बुलडोजर

Nida Khan Case Hanif Khan House: निदा खान मामले में छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम की बड़ी लापरवाही सामने आई है। एआईएमआईएम पार्षद के चक्कर में गरीब मिस्त्री का घर तोड़ा, हाई कोर्ट सख्त।

अनिल सिंह

Nida Khan Case Hanif Khan House Demolished Bombay High Court: नासिक के टीसीएस (TCS) दफ्तर में कर्मचारियों के कथित धर्म-परिवर्तन की कोशिशों के आरोपों में घिरी मुख्य आरोपी निदा खान की तलाश में जुटी जांच एजेंसियों के चक्कर में एक बेकसूर नागरिक का घर तबाह हो गया। छत्रपति संभाजीनगर के 'कौसर बाग' इलाके में स्थित 600 वर्ग फुट के एक नवनिर्मित मकान से 8 मई को पुलिस ने निदा खान को गिरफ्तार किया था। इसके तुरंत बाद हरकत में आए नगर निगम प्रशासन ने बिना कागजात जांचे उस मकान को अवैध घोषित कर दिया और एआईएमआईएम पार्षद मतीन पटेल (जिसे भूलवश नोटिस में मतीन शेख लिखा गया) के नाम पर नोटिस चपका दिया।

असल ट्विस्ट तब आया जब इस तोड़क कार्रवाई के खिलाफ 31 वर्षीय मिस्त्री हनीफ खान ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हनीफ ने अदालत को बताया कि उन्होंने और उनके जीजा सैयद सरवर ने यह प्रॉपर्टी आमेर खान अख्तर नाम के व्यक्ति से 27 लाख में खरीदी थी, जिसकी आधिकारिक रजिस्ट्री इसी साल 12 मार्च को जॉइंट डिप्टी रजिस्ट्रार दफ्तर में हुई थी। मई के पहले हफ्ते में स्थानीय पार्षद मतीन पटेल ने उनसे यह कहकर चाबी मांगी थी कि उनके कुछ मेहमान आने वाले हैं। परिचित और पार्षद होने के नाते हनीफ ने बिना किसी शक के चाबी सौंप दी, लेकिन उन्हें भनक तक नहीं थी कि वहां निदा खान को छुपाया जा रहा है।

हाई कोर्ट के भरोसे को निगम ने ठेंगा दिखाया

इस मामले में नगर निगम के अधिकारियों की संवेदनहीनता और जल्दबाजी कोर्ट के भीतर भी उजागर हो गई। 12 मई को जब हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही थी, तब सीएसएमसी (CSMC) के वकील ने अदालत को मौखिक रूप से आश्वस्त किया था कि अगले सात दिनों तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। लेकिन कोर्ट रूम के बाहर पैर पसारते ही निगम ने उसी दिन शाम को एक नया 24 घंटे का नोटिस घर पर चिपका दिया। यह समय सीमा 13 मई को दोपहर 12 बजे खत्म होनी थी, लेकिन अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश की अवहे्लना करते हुए सुबह ही छह बुलडोजरों के साथ धावा बोलकर मकान को मलबे में तब्दील कर दिया।

"किराए के मकान से मुक्ति का सपना टूटा"

मलबे के ढेर के पास बैठे हनीफ खान ने रोते हुए अपना दर्द बयां किया, "यह हमारे पूरे परिवार का पहला अपना घर था। हम पूरी जिंदगी किराए के कमरों में गुजार चुके थे और इस घर में शिफ्ट होने से पहले इसकी थोड़ी मरम्मत करवा रहे थे। हमारी पाई-पाई की कमाई इस घर को खरीदने में लग गई, जिसे प्रशासन ने बिना सोचे-समझे एक झटके में तोड़ दिया।" इस कार्रवाई में हनीफ के घर के साथ-साथ पास की एक कंस्ट्रक्शन मटेरियल की दुकान और अन्य रिहायशी ढांचे को भी ढहा दिया गया है।

मेयर और प्रशासन ने साधी चुप्पी

इस पूरे विवाद के बाद छत्रपति संभाजीनगर के मेयर समीर राजुरकर और निगम के अतिक्रमण विभाग के आला अधिकारियों ने बैकफुट पर आते हुए मीडिया से दूरी बना ली है। अधिकारियों का कहना है कि चूंकि मामला अब बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। अदालत ने नगर निगम को सभी संबंधित नोटिसों और स्वामित्व दस्तावेजों की मूल फाइल के साथ अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।

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