प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
औरंगाबाद

सियासी समीकरण बदले, चुनाव जीत के बाद भाजपा का बड़ा विस्तार अभियान, विपक्षी नेता हुए शामिल

Maharashtra Politics: विधानसभा जीत के बाद भाजपा अब सहयोगी दलों पर निर्भरता घटाने में जुटी है। विपक्षी दलों के कई नेता पार्टी में शामिल होकर नई सियासी तस्वीर बना रहे हैं।

अंकिता पटेल

Political Strategy Hindi News: छत्रपति संभाजीनगर भारतीय जनता पार्टी एक चुनाव संपन्न होने के बाद उस पर हार-जीत का मंथन कर व दूरदृष्टि रखकर अगले चुनाव की तैयारियों में जुट जाती है। 2024 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना शिंदे संग गठबंधन कर जिले में शत-प्रतिशत अर्थात 3 व पूरे राज्य में 132 सीटें जीतकर सत्ता कब्जाने वाली भाजपा अब सहयोगी दलों की बैसाखियां दूर करने की कवायद में अभी से जुट गई है।

इसकी बानगी तब देखने मिली, जब उसने उद्धव बालासाहब ठाकरे पार्टी उपजिलाप्रमुख व पैठण के पूर्व नगराध्यक्ष दत्तात्रय गोर्डे को पार्टी में प्रवेश दिया। इससे पहले 2024 के विधानसभा चुनाव में सिल्लोड़-सोयगांव सीट से उद्धव बालासाहब ठाकरे पार्टी के टिकट पर किस्मत आजमाने वाले सुरेश बनकर, वैजापुर से डॉ. दिनेश परदेशी, औरंगाबाद पश्चिम से राजू शिंदे ने 'गरज सरो वैद्य मरो' कहावत को चरितार्थ करते हुए भाजपा में घरवापसी की है। इस फेहरिस्त में अब दत्तात्रय गोडें भी शामिल हो गए हैं।

शिवसेना, भाजपा, राकांपा, यूबीटी के अब भाजपा में

दत्तात्रय गोर्डे का राजनीतिक सफर बेहद उतार-चढ़ाव व दलबदल का रहा है। 2018 में शिवसेना के टिकट पर 5 मर्तबा विधायक रहे व वर्तमान सांसद संदीपान भुमरे के खिलाफ रुख अपनाने से पार्टी ने उन्हें निकाल दिया था।

तदुपरांत उन्होंने अविभाजित राकांपा में प्रवेश किया था। 2019 के विस चुनाव में भुमरे के खिलाफ ताल ठोकर लोहे के चने चबाने मजबूर कर दिया था। भुमरे को 83,403 व गोर्ड को 69,264 वोट मिले थे। वंचित बहुजन आघाडी, एमआईएम संग निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी से बड़े पैमाने पर वोट विभाजन से भुमरे की नैया पार हुई थी।

2024 के विधानसभा चुनाव में गोर्डे ने पैठण से उबाठा के टिकट पर फिर किस्मत आजमाई। उनका मुकाबला शिवसेना शिंदे के प्रत्याशी विलास भुमरे से हुआ। भुमरे को 1,32,474 जबकि उबाटा के गोर्डे को 1।03,282 वोट मिले थे। इस तरह गोर्डे का दूसरी बार विधायक बनने का सपना चकनाचूर हो गया।

नपा चुनाव में पत्नी की हार से हुए आहत

दिसंबर, 2025 में संपन्न चुनाव में गोर्डे की पत्नी अपर्णा पैठण में उबाठा के टिकट पर नगराध्यक्ष पद की प्रत्याशी थीं। शिवसेना शिंदे की प्रत्याशी विद्या कावसानकर (12,500) ने उन्हें पराजित किया था। अपर्णा को (8789) वोट मिले थे। ऐसे में अपना राजनीतिक भविष्य चमकाने के लिए गोर्डे ने पुनः भाजपा का दामन थामने में ही भलाई समझी। जिला परिषद व पंचायत समिति चुनाव के ठीक पहले उनके भाजपा प्रवेश को भुमरे परिवार के काट के रूप में देखा जा रहा है। यह तो 7 फरवरी को मतगणना के दिन पता चलेगा कि मराठा समाज से ताल्लुक रखने वाले गोर्डे के प्रवेश से भाजपा को कितना लाभ हुआ।

3 सीटों पर मिली थी जीत

2024 का विधानसभा चुनाव भाजपा ने सहयोगी दल शिवसेना शिंदे संग मिलकर लड़ा था। शिवसेना शिंदे ने बंटवारे में उसे मिली जिले की 6 सीटों पर जीत हासिल की थी। भाजपा ने उसके हिस्से में आए औरंगाबाद पूर्व, फुलंब्री व गंगापुर-खुलताबाद स्थानों पर शत-प्रतिशत विजय का परचम लहराया था। उसके

प्रत्याशी क्रमशः अतुल सावे, अनुराधा चव्हाण व प्रशांत बंब ने बाजी मारी थी। बिसात बिछना अभी से शुरू 2029 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की कोशिश स्वतंत्र रूप से किस्मत आजमाकर सत्ता प्रस्थापित की है। इसकी राजनीतिक विसात बिछना अभी से शुरू हो गई है और वह अन्य दलों के प्रभावशाली नेताओं को प्रवेश देकर पार्टी को मजबूती प्रदान कर रही है।

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