Abhijeet Dipke Slams RSS: महाराष्ट्र की राजनीति में वैचारिक जंग एक नए स्तर पर पहुaच गई है। छत्रपति संभाजीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बड़े नेता अतुल लिमये के बयानों पर कड़ा पलटवार किया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब RSS के सर-सहकार्यवाह अतुल लिमये ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP के आंदोलन को 'देशविरोधी' करार दिया था।
अभिजीत दीपके ने बेहद कड़े लहजे में कहा, जिन लोगों ने महात्मा गांधी की हत्या की और जिन्होंने जीवन भर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का विरोध किया, उन्हें हमें संविधान पर व्याख्यान देने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे लोग जो ऐतिहासिक रूप से इन महापुरुषों के विरोधी रहे हैं, वे आज संविधान की शिक्षा देने का ढोंग न करें।
दरअसल, अतुल लिमये ने जंतर-मंतर के आंदोलन को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि इस आंदोलन को केवल भाजपा विरोधी प्रदर्शन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके पीछे की अराजकता को समझने की जरूरत है। लिमये के अनुसार, यह आंदोलन लोकतंत्र विरोधी और देशविरोधी था।
लिमये ने इस आंदोलन को एक केस स्टडी बताते हुए दावा किया कि इसमें वामपंथी संगठनों का बड़ा हाथ था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मंच का उपयोग भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारे लगाने वाले लोगों ने किया और यह छात्रों का आंदोलन न रहकर एक राजनीतिक प्रयोग बन गया था। उन्होंने योगेंद्र यादव के उस बयान का भी हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि देश में लोकतंत्र का भविष्य संसद नहीं, बल्कि सड़कें तय करेंगी, और इसे डिकोड करने की जरूरत बताई।
6 अगस्त को मुंबई में सरसंघचालक मोहन भागवत Gen Z और जेन अल्फा के छात्रों के साथ संवाद करने वाले हैं। इस पर कटाक्ष करते हुए दीपके ने कहा कि यह अच्छी बात है कि RSS को युवाओं से बात करने की जरूरत महसूस हुई है, लेकिन केवल बात करने से कुछ नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि संघ को अब 'पुराने चेहरों' के बजाय पढ़े-लिखे युवाओं और नए चेहरों को नेतृत्व में आगे लाना चाहिए, तभी इस संवाद का कोई वास्तविक अर्थ होगा।
अभिजीत दीपके ने बताया कि छत्रपति संभाजीनगर में उनकी पार्टी की दो दिवसीय बैठक चल रही है। इस बैठक में जंतर-मंतर आंदोलन से मिले अनुभवों पर चर्चा की जाएगी और संगठन के विस्तार के लिए भविष्य का रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस तीखी बयानबाजी ने राज्य में वैचारिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण को एक नई हवा दे दी है।