किसान आत्महत्या (सौ. सोशल मीडिया ) 
औरंगाबाद

Marathwada में 10 महीनों में 899 किसान आत्महत्या, सरकारी मदद पर सवाल

Farmers Suicide: मराठवाड़ा में किसानों की आत्महत्याओं का आंकड़ा 899 पहुंचा। सिंचाई संकट, कर्ज बोझ और मौसम की मार से स्थिति भयावह हो गई है, जबकि सरकारी सहायता की प्रक्रिया पर सवाल बढ़ रहे हैं।

अपूर्वा नायक

Farmers Committed Suicide In Marathwada: प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे किसानों को राहत प्रदान करने के लिए राज्य सरकार की ओर से शुरू की कई योजनाओं व कर्जमाफी का असर नहीं दिख रहा है।

अलग-अलग कारणों के चलते मराठवाड़ा क्षेत्र में अन्नदाताओं की आत्महत्याओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, सरकारी आंकड़ों की मानें, तो जनवरी से अक्टूबर तक के दस महीनों में मराठवाड़ा के 899 किसानों ने कुछ न कुछ कारण को लेकर मौत को गले लगाया है।

इसमें बीड़ जिला सबसे आगे है व 200 किसानों ने अपनी जीवन लीला समाप्त की है। छत्रपति संभाजीनगर 171 आंकड़े संग दूसरे स्थान पर है। इस क्षेत्र में सिंचाई की कमी, गैर सिंचित खेती व मौसम की अनिश्चितता मौत का कारण बन रही है।

560 मामलों में सहायता को दी गई मंजूरी

कहीं भारी वर्षा तो कहीं भीषण सूखे की स्थिति से किसान बुरी तरह त्रस्त हैं। पिछले वर्ष ओलावृष्टि, कभी बेमौसमी वर्षा तो कभी बाढ़ जैसी परिस्थितियों ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। खरीफ सीजन में भी हजारों हेक्टेयर फसलें पूरी तरह बर्बाद होने से अन्नदाताओं का आर्थिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया है और वे कर्ज का बोझ के तले दबते जा रहे हैं।

आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को सरकार एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता देती है। विभागीय आयुक्तालय के सूत्रों ने बताया कि अब तक 560 मामलों में सहायता की मंजूरी दी गई है व 237 जांच या निर्णय के लिए लंबित हैं।

यही नहीं, 102 मामलों को सहायता के लिए अपात्र ठहराया गया है। फसलों की क्षति के बाद सरकार ने राहत निधि की घोषणा करते हुए बाधित किसानों के बैंक खातों में पैसे जमा करने की प्रक्रिया शुरू है। इसकी गति व पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

स्थायी समाधान व समय पर मिले मदद

मराठवाड़ा के किसान आज भी संकट के चक्र में फंसे हुए हैं। प्राकृतिक आपदाएं, कर्ज का बोझ व सरकारी योजनाओं की धीमी कार्यवाही से वे हलाकान हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल आर्थिक सहायता से समस्या का समाधान नहीं होगा।

किसानों को स्थायी सिंचाई व्यवस्था, फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलने तक हालात नहीं बदलेंगे। जब तक किसानों को स्थायी समाधान व समय पर सहायता नहीं मिलेगी, तब तक यह आत्महत्याओं का सिलसिला नहीं रुकेगा। बीड़ 200, छत्रपति संभाजीनगर 171, नांदेड़ 145, धाराशिव 115, परभणी: 90, लातूर 67, जालना 58 व हिंगोली: 53।

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