वैनगंगा-नलगंगा परियोजना (सौजन्य-नवभारत) 
अमरावती

विदर्भ की किस्मत चमकी! ₹94,967 करोड़ की वैनगंगा-नलगंगा परियोजना को मंजूरी; जानें इस प्रोजेक्ट में क्या है खास

Wainganga Nalganga River Link Project: विदर्भ के लिए ऐतिहासिक दिन! वैनगंगा-नलगंगा नदी जोड़ परियोजना को ₹94,967 करोड़ की मंजूरी। अमरावती के 83,000 हेक्टेयर क्षेत्र की बदलेगी सूरत।

प्रिया जैस

Vidarbha Irrigation News: विदर्भ के सिंचाई क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव आने वाला है। राज्य सरकार ने महत्वाकांक्षी वैनगंगा-नलगंगा नदी जोड़ परियोजना को 94,967 करोड़ रुपये की भारी-भरकम प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। इस परियोजना से न केवल पश्चिम विदर्भ की प्यास बुझेगी, बल्कि अमरावती समेत छह जिलों की लाखों हेक्टेयर भूमि सिंचिंत होगी।

सूखे की पहचान होगी खत्म

इस परियोजना का सबसे अधिक लाभ अमरावती जिले को मिलने वाला है। जिले का कुल 83,571 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचाई के दायरे में आएगा, जो इस परियोजना के तहत किसी भी एक जिले के लिए सबसे बड़ा लाभ क्षेत्र है। जिले के धामणगांव रेलवे और चांदूर रेलवे (नांदगांव खंडेश्वर) तहसीलों के 354 से अधिक गांवों को सीधा लाभ मिलेगा।

तहसील वार लाभ

धामणगांव रेलवे : 33,604 हेक्टेयर नांदगांव खंडेश्वर : 49,967 हेक्टेयर

खेत तक पानी पहुंचाने का उद्देश्य

परियोजना में छोटे-बड़े भंडारण तालाबों के माध्यम से हर गांव के खेत तक पानी पहुंचाने का नियोजन है। यह एक विशाल जल प्रबंधन परियोजना है जो विदर्भ के जल संकट को स्थायी रूप से समाप्त करने की क्षमता रखती है। गोसीखुर्द बांध से लगभग 64 टीएमसी पानी उठाया जाएगा। 388 किलोमीटर लंबी नहर के जरिए पानी पश्चिम विदर्भ तक लाया जाएगा। जिससे नागपुर, वर्धा, अमरावती, यवतमाल, अकोला और बुलढाना सहित कुल 6 जिले और 15 तहसील लाभान्वित होगी। पूरे विदर्भ में कुल 3,71,277 हेक्टेयर क्षेत्र को लाभ मिलेगा।

  • 388 किमी नहर से पश्चिम विदर्भ तक पहुंचेगा पानी
  • 83 हजार हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित, अमरावती को बड़ी सौगात
  • सूखे से राहत: छह जिलों के लाखों किसानों को मिलेगा फायदा
  • गोसीखुर्द से 64 टीएमसी पानी, खेत-खेत तक पहुंचेगी सिंचाई
  • अब किसान ले सकेंगे साल में दो से तीन फसलें
  • 109 गांव होंगे प्रभावित, पुनर्वास की बड़ी चुनौती
  • सिंचाई परियोजना से बढ़ेगा रोजगार और कृषि उद्योग
  • विदर्भ के जल संकट को खत्म करने की बड़ी पहल

किसान ले सकेंगे साल में दो-तीन फसलें

वर्तमान में अमरावती का किसान मुख्य रूप से सोयाबीन और कपास पर निर्भर है। इस परियोजना के बाद संतरा बागों को शाश्वत (स्थायी) जल मिलेगा। रबी सीजन में भी पानी उपलब्ध होने के कारण किसान अब साल में दो से तीन फसलें आसानी से ले सकेंगे। इससे कृषि आधारित उद्योगों और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

विस्थापन और पुनर्वास

इतनी बड़ी परियोजना के कारण कुछ क्षेत्रों पर प्रभाव भी पड़ेगा। कुल 109 गांव इस नदी जोड़ परियोजना से प्रभावित होंगे। इनमें से 26 गांव पूरी तरह और 83 गांव आंशिक रूप से प्रभावित होंगे। कुल 3,725 परिवारों के लगभग 15,640 व्यक्ति इस मेगा प्रोजेक्ट से प्रभावित होंगे, जिनके उचित पुनर्वास का नियोजन सरकार द्वारा किया जा रहा है। यह परियोजना फिलहाल 'सर्वेक्षण और अन्वेषण' के चरण में है। उप-नहरों के माध्यम से निम्न वर्धा जैसी परियोजनाओं को भी इसके जरिए जल आपूर्ति की जाएगी।

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