नवनीत राणा बयान (सोर्सः सोशल मीडिया)
अमरावती

किसी भी पूर्व-वर्तमान नेता की रिएंट्री नहीं होगी, नवनीत राणा के बयान से अनिल बोंडे के समर्थकों में नाराजगी

Navneet Rana Statement: वरुड में नवनीत राणा के बयान के बाद वरुड-मोर्शी की राजनीति गरमा गई है। सांसद अनिल बोंडे के समर्थकों का शक्ति प्रदर्शन रद्द होने के बाद भाजपा में अंदरूनी गुटबाजी की चर्चाएं हैं।

आंचल लोखंडे

Varud Morshi Politics: अमरावती जिले के वरुड-मोर्शी विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से चल रही हलचल ने अब नया मोड़ ले लिया है। वरुड में आयोजित दहीहंडी कार्यक्रम में पूर्व सांसद नवनीत राणा द्वारा दिए गए बयान के बाद राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बोंडे के समर्थकों में नाराजगी की चर्चा शुरू हुई थी। इसी पृष्ठभूमि में 13 सितंबर को वरुड में प्रस्तावित बोंडे समर्थकों का सम्मेलन आखिरकार रद्द किया।

सभा रद्द होने के बावजूद भाजपा की स्थानीय राजनीति में अंदरूनी मतभेदों और दो गुटों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वरुड में विधायक चंदू उर्फ उमेश यावलकर की उपस्थिति में आयोजित दहीहंडी कार्यक्रम में नवनीत राणा को आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान राणा ने वरुड-मोर्शी विधानसभा क्षेत्र में ‘किसी भी पूर्व-वर्तमान नेता की रिएंट्री नहीं होनी चाहिए, इस आशय की टिप्पणी किए जाने की चर्चा है।

अनिल बोंडे समर्थकों में नाराजगी का माहौल

इस टिप्पणी का निशाना आखिर किसकी ओर था, इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें शुरू हुईं। इसके बाद डॉ. अनिल बोंडे समर्थकों में नाराजगी का माहौल बनने की बात सामने आई। इसी के चलते बोंडे समर्थकों ने 13 सितंबर को वरुड में सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी की थी। माना जा रहा था कि इस सभा के माध्यम से नवनीत राणा की टिप्पणी का जवाब दिया जाएगा।

पार्टी में गुटबाजी की चर्चा

हालांकि, भाजपा जिलाध्यक्ष तथा विधायक प्रतापदादा अडसड की भूमिका के बाद सम्मेलन रद्द कर दिया गया। सम्मेलन रद्द होने से फिलहाल संभावित शक्ति प्रदर्शन पर विराम लग गया है। विधायक चंदू उर्फ उमेश यावलकर के नेतृत्व वाली स्थानीय राजनीति और डॉ. बोंडे समर्थकों की सक्रियता के बीच भाजपा में दो गुट होने की चर्चा अब राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ रही है। हालांकि भाजपा की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी भी गुटबाजी को स्वीकार नहीं किया गया है। अब वरिष्ठ नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाता है और स्थानीय स्तर पर मतभेदों को किस तरह दूर किया जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

86 साल बाद किशाऊ बांध परियोजना को मिली हरी झंडी, अमित शाह की मौजूदगी में 6 राज्यों के बीच ऐतिहासिक समझौता

Uttar Pradesh Politics: मंत्री संजय निषाद ने UCC का किया समर्थन, बोले- जब वोट बराबर तो अधिकार भी एक हों

पटना में BPSC और दारोगा भर्ती रद्द करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे छात्र, भारी पुलिस बल तैनात

MDR on UPI: अमेरिकी दबाव में मोदी फिर सरेंडर, UPI पर फीस के नए नोटिफिकेशन पर भड़के राहुल गांधी

Swatantra Bhardwaj Bail: स्वतंत्र भारद्वाज को मिली जमानत, कब आएगा जेल से बाहर?