RTO Employees Strike (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया) 
अमरावती

RTO कर्मियों की हड़ताल से अमरावती संभाग में कामकाज ठप, सरकार को रोज 5 करोड़ का नुकसान

RTO Employees Strike: RTO कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से अमरावती संभाग के अमरावती, अकोला, यवतमाल, खामगांव और वाशिम जिलों में परिवहन सेवाएं प्रभावित हो गई हैं।

महाराष्ट्र डेस्क

Amravati Division News: मोटर वाहन विभाग कर्मचारी संगठन की अनिश्चितकालीन हड़ताल का सीधा असर अब सरकार के राजस्व पर पड़ने लगा है। अमरावती संभाग के अमरावती, अकोला, यवतमाल, खामगांव बुलढाना, और वाशिम जिलों के क्षेत्रीय व उपक्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों में अधिकांश सेवाएं ठप होने के कारण सरकारी खजाने में रोजाना करीब 5 करोड़ रुपये का राजस्व जमा होने में बड़ी बाधा खड़ी हो गई है।

आरटीओ कर्मचारियों की विभिन्न लंबित मांगों की ओर सरकार द्वारा लगातार ध्यान न दिए जाने के विरोध में यह राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की गई है। इस हड़ताल के कारण नए वाहनों का पंजीकरण, वाहनों का ट्रांसफर, ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण, टैक्स भुगतान, फिटनेस जांच, परमिट नवीनीकरण व मंजूरी के साथसाथ कोर्ट/मुकदमा विभाग की महत्वपूर्ण सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हुई हैं।

अमरावती संभाग के 5 जिलों में RTO सेवाएं ठप

इसके परिणामस्वरूप वाहन स्वामियों, परिवहन व्यवसायियों और आम नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राजस्व में भारी गिरावट दर्ज परिवहन विभाग को सरकार के राजस्व का एक बेहद महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। आरटीओ कार्यालयों के माध्यम से रोजाना करोड़ों रुपये का लेनदेन होता है। लेकिन इस हड़ताल के कारण यह कामकाज पूरी तरह से चरमरा गया है और सरकार के राजस्व में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। अकेले अमरावती संभाग में ही रोजाना करीब 5 करोड़ रुपये का राजस्व अटकने का अनुमान लगाया गया है।

क्यों हो रही है हड़ताल

कर्मचारी संगठन के अनुसार आकृतीबंध मंजूर होने के बावजूद सेवा प्रवेश नियम अभी तक लागू नहीं किए गए हैं। इसके चलते पदोन्नति, नई भर्ती और अन्य प्रशासनिक मामले सालों से लंबित पड़े हैं। सरकार से बारबार गुहार लगाने के बाद भी कोई ठोस फैसला नहीं होने के कारण आखिरकार पूरे राज्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसा कड़ा कदम उठाना पड़ा। पदाधिकारियों का कहना है कि राजस्व का रोजाना करोड़ों का नुकसान हो रहा है, फिर भी सरकार ने अभी तक कोई ठोस रुख नहीं अपनाया है।

आम नागरिक और परिवहन व्यवसायी परेशान

यह हड़ताल जितनी लंबी खिंचेगी, उसका उतना ही बड़ा नुकसान सरकार और आम नागरिकों को उठाना पड़ेगा। यह प्रतिक्रिया राज्य उपाध्यक्ष तथा अमरावती विभागीय कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष अनिल मानकर, संदीप खवले, अभिजीत गावंडे, अक्षय राठौड़, अमोल माटोडे, संजय चौधरी, मनोज खोब्रागड़े, देवेंद्र कलमकर, जयसिंह राठौड़, अरुण वाघमारे, पराग जाधव, प्रीति डोंगरे, यशवंत रामटेके और अनिल मेश्राम आदि पदाधिकारियों ने व्यक्त की है।

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