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पल्लवी गुडधे डेथ केस: डफरीन अस्पताल के डॉक्टर पर गिरी गाज; डॉ. अनुप बोंद्रे के खिलाफ FIR दर्ज

Pallavi Gudhe Death Case: पल्लवी गुडधे मृत्यु मामले में डफरीन अस्पताल के डॉक्टर अनुप बोंद्रे पर लापरवाही का केस दर्ज। जांच समिति की रिपोर्ट में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की बड़ी चूक उजागर।

प्रिया जैस

Amravati Dufferin Hospital: अमरावती के बहुचर्चित पल्लवी गुडधे मृत्यु प्रकरण में जिला महिला अस्पताल (डफरीन) के एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अनुप बोंद्रे के खिलाफ राजापेठ थाने में मामला दर्ज किया गया है। जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट में लापरवाही सामने आने के बाद कार्रवाई की गई।

पुलिस सूत्रों के अनुसार पल्लवी भूषण गुडधे (28, खारतलेगांव, अमरावती) 12 फरवरी को परिवार नियोजन ऑपरेशन के लिए डफरीन अस्पताल में भर्ती हुई थीं। जांच के दौरान उनके गर्भवती होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद 13 जनवरी को गर्भपात किया गया। बताया गया कि 16 जनवरी को डॉक्टरों ने परिवार नियोजन ऑपरेशन करने का निर्णय लिया, जबकि उस समय उनकी तबीयत पूरी तरह स्थिर नहीं थी।

लक्ष्य पूरा करने के उद्देश्य से ऑपरेशन किया गया और उन्हें एनेस्थीसिया दिया गया। ऑपरेशन के बाद उनकी हालत अचानक बिगड़ गई और शरीर पर सूजन आने लगी। उन्हें तत्काल जिला सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया गया। सुधार न होने पर परिजनों ने उन्हें रेडिएंट अस्पताल में शिफ्ट किया, जहां 16 से 23 जनवरी तक इलाज चला। उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

जांच में आया सामने

परिजनों ने डफरीन अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया और जिला कलेक्टर व पुलिस आयुक्त से शिकायत की। 27 फरवरी को जिला शल्य चिकित्सक डॉ. विनोद पवार ने पांच विशेषज्ञ डॉक्टरों की समिति गठित कर जांच शुरू कराई। प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. अपूर्व कडू और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अनुप बोंद्रे को कार्यमुक्त कर दिया गया था।

शनिवार को जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट पुलिस को सौंपी गई। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि एनेस्थीसिया देने के बाद डॉक्टर का मरीज के पास मौजूद रहना जरूरी था, लेकिन डॉ. बोंद्रे वहां से चले गए। मरीज की तबीयत बिगड़ने पर अफरा-तफरी मच गई। इसी आधार पर राजापेठ पुलिस ने डॉ. अनुप बोंद्रे के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

बरती गई लापरवाही

राजापेठ थाना प्रभारी पुनित कुलट ने बताया कि एनेस्थीसिया देने के बाद मरीज की निगरानी करना डॉक्टर की जिम्मेदारी होती है। रिपोर्ट में लापरवाही स्पष्ट पाई गई है। वहीं, चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनोद पवार ने पुष्टि की कि अंतिम जांच रिपोर्ट जिला कलेक्टर और पुलिस आयुक्त को सौंप दी गई है। इस मामले में प्रशासन पहले ही दो ठेका डॉक्टरों को कार्यमुक्त कर चुका है। अब अमरावती पुलिस जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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