अमरावती विधान परिषद चुनाव (फोटो सोर्स- नवभारत) 
अमरावती

अमरावती विधान परिषद चुनाव में बड़ा ट्विस्ट: बाजोरिया पर गुमराह करने का आरोप, महायुति के साथ पार्षद

Amravati MLC Election: अमरावती MLC चुनाव में नया मोड़। विप्लव बाजोरिया के प्रस्तावक बने अंजनगांव सुर्जी के पार्षदों ने लगाया गुमराह करने का आरोप, कहा- वे महायुति के उम्मीदवार का ही साथ देंगे।

रूपम सिंह

Maharashtra Politics MLC Election: अमरावती विधान परिषद स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव ने इस समय जिले की राजनीति में गरमाहट ला दी है। शिवसेना (शिंदे गुट) के पूर्व विधायक विप्लव बाजोरिया द्वारा अपना नामांकन पत्र दाखिल किए जाने के बाद से राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मची हुई थी। विशेष रूप से अंजनगांव सुर्जी नगर परिषद के 10 पार्षदों द्वारा उनके नामांकन पत्र पर प्रस्तावक (सूचक) के रूप में हस्ताक्षर करने के बाद से तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।

हालांकि, अब इस पूरे मामले में एक नया मोड़ आ गया है। संबंधित शिवसेना शिंदे गुट के पदाधिकारियों ने पत्रकार परिषद में विप्लव बाजोरिया पर गुमराह करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।

पार्टी आदेश का हवाला देकर कराए गए हस्ताक्षर चारों तरफ से हो रही आलोचनाओं के बाद शिवसेना शिंदे गुट के पदाधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। पार्षदों ने कहा कि विप्लव बाजोरिया ने नामांकन दाखिल करते समय हमसे कहा था कि ऐसा करने के लिए शिवसेना शिंदे गुट का आधिकारिक आदेश है। पार्टी के आदेश का सम्मान करते हुए हमने नामांकन पत्र पर प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर किए थे। लेकिन बाद में हमें समझ आया कि वास्तव में हमें गुमराह किया गया था।

महायुति के साथ रहने का संकल्प

पत्र परिषद में शिवसेना उपजिलाप्रमुख बाबूराव पाटिल उंबरकर, शिवसेना अमरावती शहर प्रमुख मुन्ना उर्फ योगेश इसोकार, सचिन वाघमारे और सुधाकर फुलंबरकर समेत तहसील संगठन के पदाधिकारियों ने दृढ़ता से अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम महायुक्ति के घटक दल हैं और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर हमारा पूरा विश्वास है। आगामी चुनाव में हम महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार के साथ ही रहेंगे। गुमराह करके लिए गए हस्ताक्षरों के कारण पैदा हुआ भ्रम अब पूरी तरह दूर हो गया है।

एक ही मंच पर आए थे विरोधी दलों के 10 नगरसेवक

विप्लव बाजोरिया ने नामांकन पत्र भरते समय अंजनगांव सुर्जी नगर परिषद के 10 पार्षदों को प्रस्तावक के रूप में शामिल किया था। इसमें शिवसेना (शिंदे गुट) 3 पार्षद, शिवसेना (ठाकरे गुट) 5 पार्षद व समाजवादी पार्टी के 2 पार्षद का समावेश था। एक ही समय में अलग-अलग और विरोधी विचारधाराओं के पार्षदों के बाजोरिया के समर्थन में आने से पूरे राज्य में इसकी चर्चा शुरू हो गई थी। लेकिन इस कदम के कारण स्थानीय स्तर पर शिवसेना पदाधिकारियों और पार्षदों को भारी आलोचना का सामना करना पड़ा।

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