

Nagpur Legislative Council Election: नागपुर विदर्भ में 5 स्थानों पर हो रहे विधानपरिषद चुनाव में नामांकन के अंतिम दिन महाविकास आघाड़ी और महायुति में काफी असंतोष दिखाई दिया। अधिकांश स्थानों पर तनाव देखने को मिला। कुछ स्थानों पर दोनों गठबंधनों के बागियों ने पर्चा दाखिल कर अपने तेवर साफ कर दिए, नागपुर में कांग्रेस से 2 लोगों ने नामांकन दाखिल किया है। कांग्रेस की ओर से जारी सूचि के अनुसार अतुल लोंढे का नाम अधिकृत तौर पर घोषित किया गया है, जबकि कांग्रेस के दिनेश ढोले ने भी नामांकन दाखल किया है।
यवतमाल स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद चुनाव प्रक्रिया में महायुति और महाविकास आघाड़ी दोनों गठबंधनों में बगावत के संकेत स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं, सोमवार को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि तक कुल 5 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र जमा किए। सोमवार को एक सीट के लिए महायुति की ओर से शिवसेना (शिंदे गुट) के दुष्यंत चतुर्वेदी, महाविकास आघाड़ी की ओर से कांग्रेस के साहेबराव पवार, भारतीय जनता पार्टी से नितिन भूतड़ा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की ओर से आर्णी के साजिद बेग मिर्जा तथा दारव्हा नगर परिषद के पूर्व नगराध्यक्ष एवं वर्तमान कांग्रेस नगरसेवक सैयद फारुख सैयद करीम ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया। यदि इन उम्मीदवारों ने नाम वापस नहीं लिया तो स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र का यह चुनाव और अधिक रोचक तथा कांटे का मुकाबला बन सकता है।
विधानपरिषद के स्थानीय प्राधिकरण चुनाव हेतु नामांकन दर्ज करने के अंतिम दिन महायुति से भाजपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री प्रविण पोटे ने पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की विशेष उपस्थिति में अपना पर्चा दाखिल किया।
स्थानीय निकायों से विधान परिषद सीट के लिए चंद्रपुर-वर्धा-गड़चिरोली निर्वाचन क्षेत्र में हो रहे चुनाव हेतु नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिवस पर सोमवार को यहां कांग्रेस की ओर से शैलेश अग्रवाल तथा भाजपा की ओर से अरुण लखानी ने शक्तिप्रदर्शन के साथ अपने नामांकन दाखिल किए। इस निर्वाचन क्षेत्र निर्दलीय प्रत्याशी सुधीरचंद कोठारी ने भी पर्चा भरा है।
गोंदिया स्थानीय स्वराज्य संस्था से विधान परिषद चुनाव के बहाने दोनों जिलों की राजनीति में एक नया और बेहद दिलचस्प अध्याय शुरू हो गया है। नामांकन पत्र दाखिल करने के आखिरी दिन जिलाधिकारी कार्यालय परिसर पूरी तरह से राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का अखाड़ा बना रहा। महायुति की मजबूत घेराबंदी और महाविकास आघाड़ी की पुरानी रणनीति के बीच होने जा रहा यह मुकाबला अब केवल एक चुनाव न रहकर वर्चस्व और प्रतिष्ठा की बड़ी लड़ाई में तब्दील हो चुका है।
भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अविनाश ब्राह्मणकर पर भरोसा जताते हुए उन्हें चुनावी मैदान में उतारा है। इसी बीच प्रफुल्ल अग्रवाल ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरकर इस चुनाव के समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया है।