मेलघाट की महिला डॉक्टर का इस्तीफा (फोटो- सोशल मीडिया)  
अमरावती

'आत्मसम्मान से बड़ा कोई..', प्रताड़ना से तंग आकर मेलघाट की महिला डॉक्टर का इस्तीफा; स्वास्थ्य विभाग में हड़क

Amravati Zilla News: मेलघाट की डॉ. शिल्पा वानखडे ने मानसिक प्रताड़ना के कारण इस्तीफा दिया, 9 बार सुनवाई के बाद भी न्याय न मिलने और अपमानित होने का आरोप। स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।

रूपम सिंह

Melghat Doctor Resignation News:  कुपोषण, मातृ मृत्यु और बाल मृत्यु दर जैसी गंभीर समस्याओं के कारण वर्षों से बदनाम रहे मेलघाट में अब स्वास्थ्य सेवाओं की नींव ही डगमगाती नजर आ रही है। जिस क्षेत्र को बेहतर चिकित्सा व्यवस्था की सबसे अधिक आवश्यकता है, वहीं एक महिला आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी को कथित मानसिक और प्रशासनिक प्रताड़ना के चलते पद से इस्तीफा देना पड़ा है।

इस घटना ने पूरे अमरावती जिले के स्वास्थ्य महकमे में हलचल मचा दी है। बैरागड क्षेत्र के चटवाबोड स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय में पदस्थ आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी (गट-ब) डॉ. शिल्पा राजू वानखडे ने अपना इस्तीफा जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीता मोहपात्र को सौंप दिया। उन्होंने अपने त्यागपत्र में मानसिक, प्रशासनिक और सामाजिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं।

नियुक्ति के बाद भी नहीं मिला विधिवत कार्यभार

डॉ. वानखडे ने बताया कि 1 जुलाई 2025 को नियुक्ति के बाद भी उन्हें उनके मूल आयुर्वेदिक अस्पताल का नियमित कार्यभार नहीं सौंपा गया। इसके विपरीत उनसे पद के अनुरूप न होने वाले कार्य करवाने का दबाव बनाया गया। दुर्गम आदिवासी क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने ओपीडी के माध्यम से मरीजों की सेवा जारी रखने का प्रयास किया।

9 बार सुनवाई, फिर भी नहीं मिला समाधान

डॉ. वानखडे के अनुसार उनके खिलाफ झूठी और द्वेषपूर्ण शिकायतें दर्ज कराई गई, जिनके आधार पर 9 बार सुनवाई हुई। तहसील चिकित्सा अधिकारी को अवगत कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उलटे गांव में सार्वजनिक रूप से अपमानित करने की घटनाएं भी सामने आईं। उन्होंने इस्तीफा देते समय उन्होंने साफ कहा कि "मेरे आत्मसम्मान से बड़ा कोई पद नहीं।"

मेलघाट की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहराता संकट

पहले से ही कुपोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहने वाले मेलघाट के लिए यह घटना एक और झटका मानी जा रही है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि डॉक्टर और अधिकारी ही सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में काम नहीं कर पाएंगे, तो आदिवासी समाज की स्वास्थ्य सेवाएं कैसे सुदृढ़ होंगी।

अस्पताल परिसर में 'घरेलू कब्जे' का आरोप

शिकायत में उल्लेख है कि एक स्वास्थ्य सेविका द्वारा अस्पताल परिसर में घरेलू सामान रखकर निवास जैसा माहौल बनाया गया, जिससे चिकित्सीय कार्य प्रभावित हो रहा था। विरोध करने पर डॉ. वानखडे को कथित रूप से अपमानित किया गया। यहां तक कि चार पहिया वाहन से बार-बार हॉर्न बजाकर मानसिक रूप से परेशान किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

  • मानसिक प्रताड़ना के आरोपों के बीच डॉक्टर ने छोड़ी नौकरी
  • कुपोषणग्रस्त मेलघाट में चिकित्सा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
  • "आत्मसम्मान से बड़ा कोई पद नहीं" महिला डॉक्टर का दर्द छलका
  • नौ बार सुनवाई, फिर भी नहीं मिला न्याय; आयुर्वेदिक अधिकारी का इस्तीफा
  • अस्पताल परिसर में 'घरेलू कब्जे' के आरोप से बढ़ा विवाद
  • प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी नजरें, क्या मिलेगी न्याय की राह ?

प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी नजरें

फिलहाल  अमरावती जिले में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं। क्या विस्तृत जांच समिति बनेगी। क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। इन सवालों के जवाब न केवल एक महिला अधिकारी को न्याय दिलाने से जुड़े हैं, बल्कि मेलघाट की स्वास्थ्य व्यवस्था और उसकी साख से भी सीधे जुड़े हुए हैं।

महिला अधिकारियों की सुरक्षा पर फिर उठ रहा है सवाल

मेलघाट जैसे संवेदनशील क्षेत्र में कार्यरत महिला अधिकारियों के साथ प्रताड़ना की घटनाएं पहले भी सुर्खियों में रही हैं। ऐसे में यह इस्तीफा स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और महिला कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।

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