प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
अमरावती

अमरावती: फडणवीस सरकार का बड़ा फैसला, बिल्डिंग प्लान ही मानी जाएगी NA मंजूरी, किसानों और बिल्डर्स को राहत

Maharashtra Na Conversion Rules News: राज्य सरकार ने एनए प्रक्रिया सरल की है। अब स्वीकृत निर्माण नक्शा ही एनए अनुमति माना जाएगा और वार्षिक कर भी खत्म कर दिया गया है।

रूपम सिंह

Maharashtra Non-Agricultural Land Permission News: राज्य सरकार ने कृषि भूमि को गैर-कृषि (एनए) उपयोग में बदलने की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए बड़ा फैसला लिया है। अब एनए अनुमति के लिए जिलाधिकारी से अलग से मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। नगर रचना विभाग या स्थानीय नियोजन प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत निर्माण नक्शा ही एनए अनुमति मानी जाएगी।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने यह निर्णय लिया है। इस संबंध में राजपत्र जारी कर महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता में महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है। साथ ही वार्षिक गैर-कृषि कर को भी समाप्त कर दिया गया है।

प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होने की उम्मीद

अब तक नागरिकों को निर्माण नक्शा मंजूरी के बाद एनए अनुमति के लिए जिलाधिकारी कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे। नए नियमों के अनुसार यदि भूमि का उपयोग विकास आराखड़े (डेवलपमेंट प्लान) के अनुसार अनुमेय है, तो नियोजन प्राधिकरण की मंजूरी ही अंतिम मानी जाएगी। इससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होने की उम्मीद है।

सरकार जनकल्याण के लिए प्रतिबद्ध

चंद्रशेखर बावनकुले राजस्व मंत्री ने बताया की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देशानुसार यह निर्णय लिया गया है। महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता में आवश्यक संशोधन कर जनता को बड़ी राहत दी गई है। फडणवीस सरकार जनकल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। अब वार्षिक गैर-कृषि कर भी समाप्त कर दिया गया है।

एनए सनद की अनिवार्यता समाप्त

सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियोजन प्राधिकरण की अनुमति मिलने के बाद बैंक एनए सनद की मांग नहीं कर सकते। अमरावती जिलाधिकारियों को यह निर्देश सभी बैंकों तक पहुंचाने के आदेश दिए गए हैं। जिन नागरिकों पर गैर-कृषि कर बकाया है, उन्हें इस संशोधन की तारीख तक की बकाया वसूली से राहत दी गई है। हालांकि 2001 से पहले या बाद में गैर-कृषि घोषित भूमि धारकों को एक वर्ष के भीतर निर्धारित दर से एकमुश्त रूपांतरण अधिमूल्य जमा करना होगा।

अब निर्माण अनुमति के लिए BPMS या Auto DCR प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। निर्माण मंजूरी मिलते ही 7/12 उतारे में स्वचालित फेरबदल दर्ज होगा। हालांकि 'भोगवटादार वर्ग-2' श्रेणी में परिवर्तन के लिए निर्धारित नजराना शुल्क देना अनिवार्य रहेगा। सरकार के इस फैसले से राज्यभर के जमीन मालिकों, बिल्डरों और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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