Anil Kumar Saumitra Director IIMC Amravati (फोटो क्रेडिट-X) 
अमरावती

IIMC में घिरे अनिल सौमित्र को हाई कोर्ट से मिली राहत, प्रोफेसर ने लगाया था प्रताड़ना का आरोप, FIR रद्द

IIMC Amravati Controversy: भारतीय जनसंचार संस्थान अमरावती के रीजनल डायरेक्टर अनिल सौमित्र पर जातिगत टिप्पणी और भेदभाव के आरोप में FIR दर्ज। प्रोफेसर विनय सोनुले की नियुक्ति रद्द करने पर मचा बवाल।

अनिल सिंह

Anil Kumar Saumitra FIR: भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) का अमरावती परिसर इन दिनों एक गंभीर विवाद के केंद्र में है। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन आने वाले इस प्रतिष्ठित संस्थान में 'जातिगत भेदभाव' और 'प्रशासनिक खींचतान' का मामला सामने आया है। संस्थान के रीजनल डायरेक्टर अनिल कुमार सौमित्र के खिलाफ असिस्टेंट प्रोफेसर विनय सोनुले ने एससी-एसटी (SC-ST) एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। हालांकि बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने उन्हें राहत देते हुए इस मामले दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है।

क्या था मामला?

बता दें कि यह विवाद तब और गहरा गया जब एफआईआर दर्ज होने से कुछ ही घंटे पहले प्रो. सौमित्र ने प्रो. विनय की नियुक्ति रद्द करने का ईमेल जारी कर दिया। अब यह मामला दिल्ली मुख्यालय से लेकर पुलिस थाने तक पहुँच चुका है।

अपमान और सुविधाओं से वंचित करने का आरोप

असिस्टेंट प्रोफेसर विनय सोनुले ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि एक विशिष्ट जाति से संबंध रखने के कारण उन्हें जुलाई 2021 से ही निशाना बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, उन्हें छात्रों और स्टाफ के सामने सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों से हटाया गया। प्रो. विनय ने दावा किया कि उन्हें कक्षाएं लेने से रोका गया और प्रिंटर व आधिकारिक ईमेल जैसी बुनियादी तकनीकी सुविधाओं के इस्तेमाल से भी वंचित कर दिया गया। उनके मुताबिक, यह प्रताड़ना तब बढ़ गई जब उन्होंने सौमित्र की शिकायत दिल्ली स्थित मुख्यालय में की।

विवादों से पुराना नाता: कौन हैं अनिल सौमित्र?

भारतीय जनसंचार संस्थान के रीजनल डायरेक्टर अनिल कुमार सौमित्र का इतिहास विवादों भरा रहा है। अक्टूबर 2020 में IIMC में नियुक्ति से पहले वे मध्य प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता थे। साल 2019 में उन्होंने महात्मा गांधी को 'फादर ऑफ पाकिस्तान' कहकर बड़ा विवाद खड़ा किया था, जिसके बाद भाजपा ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इसके अलावा, भाजपा के मुखपत्र 'चरैवेति' के संपादक रहते हुए भी उन्होंने चर्च और नन से जुड़े एक लेख को लेकर काफी आलोचना झेली थी। अब IIMC अमरावती में उनके द्वारा एक प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द करने के अधिकार पर भी सवाल उठ रहे हैं।

कानूनी कार्रवाई और संस्थान का रुख

अमरावती पुलिस के डीसीपी एमएम मकानदार के अनुसार, पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। दूसरी ओर, प्रो. विनय का तर्क है कि रीजनल डायरेक्टर के पास उनकी नियुक्ति रद्द करने का अधिकार नहीं है क्योंकि उनका अनुबंध दिल्ली मुख्यालय से हुआ है। IIMC के महानिदेशक संजय द्विवेदी ने फिलहाल इस मामले पर विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार किया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सूचना प्रसारण मंत्रालय की नजर भी इस घटनाक्रम पर बनी हुई है।

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