Dufferin Hospital Sewage Plant News: अमरावती जिला महिला अस्पताल यानी डफरीन में रोजाना सैकड़ों मरीजों का उपचार किया जाता है। अस्पताल से निकलने वाले दूषित पानी से पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा न हो, इसके लिए करीब 3 करोड़ रुपए खर्च कर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया।
लेकिन प्लांट तैयार हुए एक वर्ष बीतने के बावजूद यह अब तक शुरू नहीं हो सका है। विशेष बात यह है कि प्लांट की प्रतिदिन दो लाख लीटर दूषित पानी पर प्रक्रिया करने की क्षमता है, लेकिन अस्पताल का दूषित पानी प्लांट तक पहुंचाने वाली मूलभूत व्यवस्था ही अब तक अधूरी है।
करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार किया गया प्रकल्प उपयोग में नहीं आने से इसके नियोजन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। प्लांट तैयार होने के बावजूद अस्पताल से दूषित पानी वहां तक पहुंचाने की व्यवस्था पूरी नहीं होने से पूरे प्रकल्प का उद्देश्य ही अधूरा रह गया है।
अस्पताल से निकलने वाला दूषित पानी सामान्य घरेलू दूषित पानी की तुलना में अधिक संवेदनशील होता है। इसमें सूक्ष्मजीव, जैविक घटक, दवाइयों और एंटीबायोटिक्स के अवशेष तथा विभिन्न रासायनिक तत्व हो सकते हैं। ऐसे दूषित पानी का वैज्ञानिक पद्धति से उपचार किए बिना निपटारा करने पर पर्यावरण के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए डफरीन अस्पताल में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया है।
प्लांट की प्रतिदिन दो लाख लीटर दूषित पानी पर प्रक्रिया करने की क्षमता है। इसके बावजूद अस्पताल में रोजाना बड़ी मात्रा में दूषित पानी निकलते समय करोड़ों रुपए की यह व्यवस्था वर्षभर से बंद है। संबंधित व्यवस्था जल्द पूरी कर प्लांट शुरू करने की आवश्यकता है।
अस्पताल से निकलने वाले दूषित पानी को ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने के लिए आवश्यक पाइपलाइन और अन्य व्यवस्था का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है। इसके चलते 3 करोड़ रुपए का प्रकल्प प्रत्यक्ष उपयोग में नहीं आ सका, अस्पताल प्रशासन के अनुसार दूषित पानी को प्लांट तक पहुंचाने की व्यवस्था पूरी होने के बाद ही इसे शुरू किया जाएगा।
डफरीन अस्पताल के दूषित पानी में विभिन्न सूक्ष्मजीव, जैविक घटक, दवाइयों के अवशेष और रासायनिक तत्व हो सकते हैं। इसलिए इसका वैज्ञानिक पद्धति से उपचार आवश्यक है। दूषित पानी को वॉटर प्युरिफिकेशन प्लांट तक पहुंचाने की सुविधा तैयार की जा रही है। यह काम पूरा होते ही प्लांट शुरू कर दिया जाएगा।
- डॉ. विनोद पवार, जिला शल्यचिकित्सक