Kharif Sowing (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया) 
अमरावती

अमरावती में मानसून की देरी, बारिश की बेरुखी से खरीफ बुआई ठप, किसानों की बढ़ी चिंता

Lack of Rainfall: अमरावती जिले में जून माह का आधा समय बीत जाने के बावजूद पर्याप्त बारिश नहीं होने से खरीफ सीजन प्रभावित हो रहा है। किसानों ने खेतों की तैयारी, बीज और खाद की व्यवस्था कर ली है।

महाराष्ट्र डेस्क

Amravati Farmers: जून का महीना आधा बीत जाने के बाद भी उम्मीद के मुताबिक बारिश न होने के कारण जिले में इस साल खरीफ का सीजन पूरी तरह खतरे में आ गया है। पर्याप्त बारिश न होने से किसानों की बुआई अटक गई है, जिससे बलिराजा की चिंता दिनबदिन बढ़ती जा रही है। आमतौर पर हर साल मृग नक्षत्र के आगमन के साथ ही झमाझम बारिश की शुरुआत हो जाती थी और किसान बुआई के काम में जुट जाते थे।

लेकिन इस साल आसमान में बादलों की आवाजाही तो दिख रही है, मगर पानी न बरसने से खेती का पूरा गणित ही बिगड़ गया है। फोटोकिसानकुर्हा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में किसानों ने खेतों की जुताई व मशागत का काम पहले ही पूरा कर लिया है।

किसान बेबस

बाजार से महंगे दामों पर बीज, खाद और अन्य जरूरी कृषि सामग्रियां खरीदकर रख ली गई हैं। कई छोटे और सीमांत किसानों ने तो कर्ज लेकर खेती का यह शुरुआती खर्च किया है। अब सब कुछ तैयार होने के बावजूद केवल बारिश न होने से बुआई शुरू नहीं हो पा रही है, जिससे किसान खुद को बेबस महसूस कर रहे हैं।

सोयाबीन और कपास की बुआई पर संकट

किसानों को डर है कि अगर बुआई का सही समय हाथ से निकल गया, तो इस साल फसलों के उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। जल्दबाजी में न करें बुआई पिछले कुछ दिनों से पड़ रही तेज गर्मी के कारण जमीन की नमी पूरी तरह खत्म हो चुकी है।

जून आधा बीता, खेत खाली

ऐसे में कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अब अगर थोड़ीबहुत बारिश होती भी है, तो किसान तुरंत बुआई की जल्दबाजी न करें। जब तक लगातार और संतोषजनक बारिश नहीं हो जाती, तब तक बुआई करना बेहद जोखिम भरा साबित हो सकता है क्योंकि बीज खराब होने का खतरा रहता है।

पर्याप्त बारिश न होने से खेती प्रभावित

इन फसलों पर पड़ेगा सीधा असर ग्रामीण इलाकों में इस समय हर तरफ केवल और केवल बारिश की ही चर्चा चल रही है। किसानों की नजरें टकटकी लगाए आसमान की ओर टिकी हुई हैं। यदि अगले कुछ दिनों में समय पर पानी नहीं बरसा, तो इस क्षेत्र की मुख्य खरीफ फसलों सोयाबीन, कपास, तुअर अरहर, मूंग और उड़द की बुआई और उनके चक्र पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा।

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