अन्नदाता फिर चिंता में, मृग नक्षत्र में बारिश की बेरुखी, खरीफ फसलों पर मंडराया संकट

Kharif Crop Crisis: साकोली क्षेत्र में मृग नक्षत्र शुरू होने के बावजूद पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान चिंता में हैं। खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है।
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Farming Preparation (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
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Sakoli Farmers: खरीफ सीजन की भाग्यरेखा माने जाने वाले मृग नक्षत्र की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन इस वर्ष किसानों के चेहरे पर खुशी के बजाय चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही हैं। जून का दूसरा सप्ताह समाप्त हो गया है, बावजूद इसके आसमान में बारिश के ठोस संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं। इससे तहसील सहित पूरे क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ गई है। रोहिणी नक्षत्र के सूखा बीत जाने के बाद किसानों की उम्मीदें मृग नक्षत्र से जुड़ी थीं, लेकिन अब मौसम की बेरुखी ने उन्हें मायूस कर दिया है।

मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष औसत से कम बारिश का अनुमान जताया गया है, जिससे बुआई के मुहाने पर खड़े किसानों के सामने दोहरी समस्या खड़ी हो गई है। वर्तमान में तहसील सहित जिलेभर में मानसून पूर्व की बारिश के बजाय तेज धूप और भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है।

जून का दूसरा सप्ताह खत्म

जुलाई से सितंबर तक के मुख्य मानसूनी महीनों में अल नीनो की सक्रियता की आशंका जताई जा रही है, जिससे मानसून के दौरान लंबे ब्रेक पड़ने का खतरा बना हुआ है। हालांकि जून से अगस्त के बीच कुछ स्थानों पर सामान्य वर्षा हो सकती है। इसका सीधा असर खरीफ फसलों की बढ़वार और उत्पादन पर पड़ सकता है।

अभी बुआई करना जोखिम भरा है

वडद के किसान क्रिष्णा नागरीकर ने कहा कि, इस बार बारिश में हो रही देरी से हमारी चिंता बढ़ गई है। बीज और खेती की तैयारी पूरी है, लेकिन बिना पर्याप्त बारिश के बुआई करना जोखिम भरा है। अगर जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो हमें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

किसान जल्दबाजी से बचें

तहसील कृषि अधिकारी आदित्य घोगरे ने कहा कि किसानों को जल्दबाजी में बुआई करने से बचना चाहिए। जब तक खेत में पर्याप्त नमी न हो, तब तक इंतजार करना ही समझदारी है। मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करना जरूरी है, तभी नुकसान से बचा जा सकता है।