Road Accident Prevention (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया) 
अमरावती

अमरावती में जीरो फैटालिटी डिस्ट्रिक्ट अभियान, सड़क हादसों में मौतें रोकने के लिए पुलिस को विशेष प्रशिक्षण

Amravati Police Training: अमरावती में 'जीरो फैटालिटी डिस्ट्रिक्ट' अभियान के तहत पुलिस अधिकारियों और क्रिटिकल कॉरिडोर टीम को सड़क सुरक्षाके लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 

आंचल लोखंडे

Amravati Road Safety: भारत में होने वाले कुल सड़क हादसों की संख्या में महाराष्ट्र राज्य देश में तीसरे स्थान पर है। जिला स्तर पर दुर्घटनाओं और उनके कारण होने वाली मौतों के प्रमाण को कम करने के उद्देश्य से एक विशेष पहल शुरू की गई है। महाराष्ट्र राज्य के पुलिस महानिदेशक और मुंबई के अपर पुलिस महानिदेशक के निर्देशों के अनुसार अमरावती संभाग के 6 पुलिस घटक और क्रिटिकल कॉरिडोर टीम के लिए एक दिवसीय जीरो फैटालिटी डिस्ट्रक्ट प्रशिक्षण कार्यशाला ली गई, कार्यशाला अमरावती के श्री शिवाजी विज्ञान महाविद्यालय स्थित डॉ. सी.व्ही. रमण हॉल में हुई।

स्वयंसेवी संस्था सेव लाइफ फाउंडेशन के प्रतिनिधि गौतम सिंह, निलेश सालुंखे, विवेक भुसे, श्रेयस ऐरंडे और वैष्णवी कायलकर ने उपस्थित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया। इस दौरान सड़क हादसों में होने वाली मौतों के आंकड़े को शून्य पर लाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई। कार्यशाला में बताया गया कि क्रिटिकल कॉरिडोर टीम को गंभीर और जानलेवा हादसों के कारणों, दुर्घटना के सटीक स्थान और वजहों का गहन विश्लेषण करना चाहिए।

अमरावती में पुलिस को दिए गए विशेष निर्देश

साथ ही, इन हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय बिठाकर उचित उपाय करने पर जोर दिया गया। पुलिस आयुक्त राकेश ओला के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यशाला में अकोला के अपर पुलिस अधीक्षक बी। चंद्रकांत रेड्डी, अमरावती शहर उपायुक्त प्रांजली सोनवणे, अपर पुलिस अधीक्षक दत्ता तोटवाड, वाशिम अपर पुलिस अधीक्षक लता फड, बुलढाणा अपर पुलिस अधीक्षक पीयुष जगताप, यवतमाल अपर पुलिस अधीक्षक अशोक थोरात सहित अमरावती ग्रामीण, अमरावती शहर, बुलढाणा, अकोला, वाशिम, यवतमाल के क्रिटिकल कॉरिडोर टीम और हाईवे पुलिस बल के अधिकारी व कर्मचारी प्रशिक्षण में शामिल हुए।

इन 6 मुख्य कारणों पर की जाएगी सख्त कार्रवाई

सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए मोटर वाहन अधिनियम के तहत शराब पीकर वाहन चलाना, गति सीमा का उल्लंघन, लापरवाही से वाहन चलाना, गलत दिशा में वाहन चलाना, हाईवे या मुख्य सड़कों पर भारी वाहनों को अवैध रूप से खड़ा करना ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

वहीं दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ाई जाएंगी। इसके अलावा, हादसे के शिकार लोगों को 'गोल्डन ऑवर के भीतर तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाने की व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विशेष बल दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों के अलग-अलग समूह बनाकर प्रैक्टिकल और उपायों पर फीडबैक भी लिया गया।

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