सूरज चढोकर की मौत पर भड़का जनआक्रोश (फोटो नवभारत)
अमरावती

अमरावती: जुए के अड्डे पर पुलिस की रेड में भगदड़, कुएं में गिरने से युवक की मौत, मोर्शी थाने में किया प्रदर्शन

Amravati Youth Death In Police Raid: मोर्शी में पुलिस छापेमारी के दौरान भगदड़ में 33 वर्षीय सूरज चढोकर कुएं में गिर गया। 48 घंटे बाद शव मिला। 300 ग्रामीणों ने पुलिस के खिलाफ थाने में प्रदर्शन किया।

आलोक उमाकृष्ण

Youth Death In Police Raid Villagers Protest: अमरावती जिले में मोर्शी तहसील के डोंगरयावली गांव के खेत परिसर में पुलिस की छापेमारी के दौरान मची भगदड़ में 33 वर्षीय सूरज अशोकराव चढोकर की कुएं में गिरने से मौत हो गई।

घटना के दो दिन बाद कुएं से शव मिलने के बाद मोर्शी में जनआक्रोश भड़क उठा। करीब 250 से 300 महिलाओं और ग्रामीणों ने मोर्शी पुलिस स्टेशन पहुंचकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर थाने में डेरा डाल दिया।

पुलिस ने अचानक छापा मारा

सूत्रों के अनुसार 20 अगस्त की आधी रात को मोर्शी पुलिस को सूचना मिली थी कि नीलेश बोपची के खेत में ताश के पत्तों पर पैसों की हार-जीत का खेल चल रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने रात करीब 12 बजे खेत में अचानक छापा मारा। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से 9 लोगों को पकड़ा, जबकि कई लोग अंधेरे का फायदा उठाकर वहां से भाग निकले।

इसी दौरान सूरज चढोकर भी घबराकर भागने लगा। खेत से करीब 200 से 300 मीटर की दूरी पर स्थित कुएं का उसे अंदाजा नहीं लगा और वह उसमें गिर गया। अंधेरा होने के कारण तत्काल उसका पता नहीं चल सका। घटना की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों में पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे।

48 घंटे बाद मिला शव

घटना के करीब 48 घंटे बाद 22 अगस्त को सूरज का शव खेत के कुएं में दिखाई दिया। सूचना मिलने पर ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। शव को कुएं से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए उपजिला अस्पताल, मोर्शी भेजा गया। शव मिलने की खबर फैलते ही डोंगरयावली सहित मोर्शी क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बन गया।

थाने में ग्रामीणों का ठिया

घटना से आक्रोशित 250 से 300 महिलाएं और ग्रामीण मोर्शी पुलिस स्टेशन पहुंच गए। आंदोलनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए थाने में डेरा डाल दिया। ग्रामीणों ने मांग की कि जुआ अड्डे पर कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए और मृतक के परिवार को आर्थिक मुआवजा दिया जाए।

लिखित आश्वासन पर अड़े रहे ग्रामीण

मोर्शी के ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने शव नहीं उठाने और पोस्टमार्टम नहीं होने देने की बात भी कही।

पुलिस ने संभाला मोर्चा अधिकारियों

स्थिति तनावपूर्ण होने पर उपविभागीय पुलिस अधिकारी उमेश पाटिल और प्रभारी थानेदार वाघमारे ने आंदोलनकारियों से चर्चा की। अधिकारियों ने बताया कि तत्काल सरकारी स्तर पर आर्थिक मदद देना संभव नहीं है।

हालांकि, पूरे घटनाक्रम की गहन जांच कर दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। इसके बावजूद ग्रामीण लिखित आश्वासन और ठोस आर्थिक मदद की मांग पर अड़े रहे। देर रात तक मोर्शी पुलिस स्टेशन परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

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