Amravati Archer Kumkum Mohod: घर की सामान्य आर्थिक स्थिति, पिता का घर पर मिठाई के डिब्बे बनाने का काम और मां गृहिणी। इन परिस्थितियों के बीच माता-पिता के अपनी बेटी को खेल जगत में देश का नाम रोशन करते देखने के सपने को पूरा करने के लिए कुमकुम मोहोड ने धनुष-बाण थामा।
कठिन संघर्ष और चुनौतियों को पार करते हुए कुमकुम ने जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। अमरावती की इस होनहार तीरंदाज की सफलता ने शहर का नाम भी रोशन किया है। कुमकुम सुलोचना बेन कापडिया जूनियर कॉलेज की छात्रा है।
कुमकुम की पारिवारिक पृष्ठभूमि बेहद साधारण है। उसके पिता अनिल मोहोड घर पर मिठाई के डिब्बे बनाने का काम करते हैं, जबकि मां रूपाली गृहणी हैं। मां की प्रेरणा से कुमकुम ने करीब 6 साल पहले तीरंदाजी की शुरुआत की थी। कोच प्रफुल्ल डांगे के मार्गदर्शन में उसने शुरुआती गुर सीखे।
वर्ष 2023 में अमरावती में खेलो इंडिया केंद्र शुरू होने के बाद उसने वहां अभ्यास जारी रखा, जहां उसे कोच गिरीश कुकडे का मार्गदर्शन भी मिला। कुमकुम के कोच प्रफुल्ल डांगे ने उसकी उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि उसने फाइनल मैच में एक अनुभवी तीरंदाज की तरह खेल दिखाया। दबाव के पलों में उसने पूरे अंक हासिल किए और अपनी जिम्मेदारी निभाई। उसने शहर और देश का मान बढ़ाया है।
शहर के गोसावी कॉलोनी स्थित अपने साधारण से घर से एशियन गेम्स के पोडियम तक का सफर 17 वर्षीय कुमकुम अनिल मोहोड ने अपनी लगन से तय किया। कुमकुम एशियन गेम्स में तीरंदाजी स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली अमरावती की पहली खिलाड़ी बन गई हैं।
अपने करियर के पहले ही सीनियर सीजन में शंघाई और अंताल्या (तुर्की) में लगातार दो 'वर्ल्ड कप' गोल्ड मेडल जीतने के बाद, कुमकुम ने डेब्यू एशियन गेम्स में व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही मिक्स टीम स्पर्धा में रजत पदक जीतकर अपनी दोहरी उपलब्धि दर्ज की।
कुमकुम की इस ऐतिहासिक जीत से उसके पिता अनिल मोहोड और मां रूपाली की खुशी का ठिकाना नहीं है। पिता अनिल मोहोड ने भावुक होते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में उसने इतनी बड़ी उड़ान भरी है, जिस पर हमें गर्व है। उसकी सफलता देखकर मां की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। कुमकुम के अमरावती लौटने पर उसके भव्य।
स्वागत की तैयारियां शुरू हुई हैं। परिजनों ने बताया कि कुमकुम 5 अक्टूबर को अमरावती आ रही है। इस अवसर पर राजकमल चौक से डिविजनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तक उसकी विशाल जुलूस निकाला जाएगा। गुजराती एजूकेशन सोसायटी के अध्यक्ष सीए नीलेश लाठिया तथा कार्यकारिणी सदस्यों एवं मुख्याध्यापिका अंजली देव ने कुमकुम की सफलता को लेकर खुशी व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी तथा आगे के उज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।