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अल-नीनो के प्रभाव के चलते अमरावती जिले में कम बारिश हुई है, जिससे सूखे जैसी स्थिति पैदा हो गई है।
फसल नुकसान की भरपाई के लिए राज्य सरकार को 734 करोड़ रुपए की सहायता का प्रस्ताव भेजा गया है।
जिले में पशुधन के लिए 100 दिनों तक पर्याप्त चारा उपलब्ध है।
Amravati Drought Situation: अल-नीनो के प्रभावों के चलते जिले में कम बारिश के कारण सूखे जैसी स्थिति पैदा हो गई है। इस स्थिति से निपटने के लिए आने वाले दिनों में जलसंधारण के कार्य प्राथमिकता से करने होंगे। इसमें प्रशासनिक तंत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी और उन्हें पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए, ऐसे निर्देश पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने दिए हैं। फसल नुकसान भरपाई के लिए 734 करोड रूपए की सहायता देने का प्रस्ताव सरकार को भेजने की बात उन्होंने बताई।
नियोजन भवन में सोमवार को जिले में उत्पन्न सूखा जैसी स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में सांसद बलवंत वानखेड़े, डॉ. अनिल बोंडे, विधायक प्रवीण पोटे, केवलराम काले, प्रताप अडसड, सुलभा खोडके, राजेश वानखड़े, गजानन लवटे, उमेश यावलकर, प्रवीण तायडे, विभागीय आयुक्त नयना गुंडे, जिलाधिकारी आशीष येरेकर, मनपा आयुक्त डॉ. मंगेश गोदावले, मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्यम गांधी और उपविभागीय अधिकारी सिद्धार्थ शुक्ला समेत कई प्रमुख अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
पालकमंत्री ने बताया कि जिले में औसत का केवल 56 प्रतिशत ही बारिश हुई है। किसानों की मदद के लिए शत-प्रतिशत फसल सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो चुका है। फसल के नुकसान की भरपाई के लिए राज्य शासन को 734 करोड़ रुपए की सहायता का प्रस्ताव भेजा गया है। इसके अलावा जिन किसानों के पास पर्याप्त पानी उपलब्ध है, उन्हें रबी फसलों के लिए 12 घंटे बिजली आपूर्ति दी जा रही है। साथ ही, किसानों को अधिक पानी की खपत वाली रबी फसलें न उगाने के संबंध में मार्गदर्शन व जनजागृति की जाएगी।
जिले के पशुधन के लिए 100 दिनों तक पर्याप्त चले इतना चारा उपलब्ध है। चारे की कमी को पूरा करने के लिए गा (गालपेर) जमीनों पर चारा उगाने का काम शुरू कर दिया गया है। वैरण विकास कार्यक्रम के तहत 20 हेक्टेयर गाल्पर क्षेत्र में चारा खेती का उपक्रम चलाया जा रहा है। जिले से बाहर चारा न जाए, इसके लिए कठोर अंमलबजावणी करने और उपाय सुझाने हेतु एक समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कुटार से ब्रिक्स (इंटे) बनाने वाले उद्योगों को 50 प्रतिशत कुटार आरक्षित रखने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। भूजल सर्वेक्षण विभाग द्वारा भूजल स्तर बढ़ाने के लिए 1,700 रिचार्ज शाफ्ट के काम सुझाए गए हैं। इसके अलावा, वीबीजी रामजी योजना के तहत 1,800 जलसंधारण के कार्य किए जाएंगे और 42 हजार जलतारा गड्ढे खोदे जाएगे। सूखे से जुड़े 11 विभागों के समन्वय के लिए 'डिस्ट्रिक्ट कनेक्ट ऐप' शुरू किया गया है।
कम बारिश के कारण जिले का भूजल स्तर गिर गया है और प्रमुख जलाशयों में आधा ही पानी बचा है। उपलब्ध जल भंडार में से पेयजल को प्राथमिकता से आरक्षित किया गया है। मोशी क्षेत्र में बोरवेल का जलस्तर काफी नीचे चले जाने के कारण वहां नए बोरवेल खोदने की अनुमति नहीं दी जाएगी। खराब हो चुके बोरवेल के पुनरुत्थान के लिए विशेषज्ञों का मार्गदर्शन लिया जाएगा।