अमरावती साइबर ठगी- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया) 
अमरावती

अमरावती में अकाउंट रेंटल रैकेट का पर्दाफाश, साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल हो रहे थे बैंक खाते

Account Rental Racket: अमरावती के दर्यापुर में पुलिस ने अकाउंट रेंटल और मनी म्यूल साइबर रैकेट का पर्दाफाश किया है। आरोपियों पर युवाओं के नाम से बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगी की।

आंचल लोखंडे

Amravati Cyber Fraud: डिजिटल क्रांति के इस दौर में साइबर अपराधी अब ठगी के नए-नए और खौफनाक तरीके अपना रहे हैं। दर्यापुर पुलिस ने एक ऐसे ही अकाउंट रेंटल रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जहां भोले-भाले लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे और फिर उन खातों का इस्तेमाल देश भर में साइबर ठगी के पैसे छिपाने और निकालने के लिए किया जा रहा था। इस मामले में पुलिस ने दो शातिर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जिनके तार राजस्थान के बड़े साइबर अपराधी गिरोहों से जुड़े होने की आशंका है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपियों ने इलाके के कुछ युवकों को पैसों का मोटा लालच दिया और उन्हें दर्यापुर के बनोसा स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र की बनोसा शाखा में नए खाते खुलवाने के लिए तैयार किया। पुलिस की गहन जांच में जो सच सामने आया, वह चौंकाने वाला था। सुरेश उमेशराव चौहान, सूरज सुरेशराव चौखड़े और आशुतोष सम्राट सोलंके के नाम पर खाते खुलवाए गए थे, वे खुद उन खातों का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे।

बनोसा के बैंक ऑफ महाराष्ट्र में खोले थे खाते

आरोपियों ने इन खातों के पासबुक, एटीएम कार्ड और सबसे महत्वपूर्ण, ऑनलाइन बैंकिंग के क्रेडेंशियल्स को तुरंत राजस्थान के जोधपुर भेज दिया था । इसका मतलब साफ था कि अमरावती में बैठे लोगों के नाम पर खुले इन बैंक खातों को सैकड़ों किमी दूर जोधपुर से साइबर अपराधी ऑपरेट कर रहे थे। इन खातों का इस्तेमाल देश के किसी भी हिस्से में हुई ऑनलाइन ठगी जैसे डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी स्कैम, या टास्क स्कैम के पैसे को तुरंत ट्रांसफर करने के लिए किया जाना था। दर्यापुर थाने की पुलिस कर्मी निवृत्ति बाबूराव बरगट (35) की शिकायत पर अभय मोहन कैथवास (22, अवधुत नगर, बनोसा, दर्यापुर) व सौरभ जोशी (44, बालजी नगर, सांगरिया, जोधपुर, राजस्थान) के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

'अकाउंट रेंटल' और 'मनी म्यूल' स्कैम?, सतर्क रहे नागरिक

अमरावती में पकड़ा गया यह मामला साइबर अपराध की दुनिया के एक बहुत बड़े और काले कारोबार, 'मनी म्यूल' का हिस्सा है। साइबर ठग गरीब, बेरोजगार या छात्रों को निशाना बनाते हैं। उन्हें चंद हजार रुपये देकर उनके नाम पर बैंक खाता खुलवाने के लिए राजी किया जाता है। खाता खुलते ही ठग उसका एटीएम कार्ड, चेकबुक और नेट बैंकिंग का कंट्रोल ले लेते हैं। इसके बदले वे खाताधारक को हर महीने या हर ट्रांजैक्शन पर किराया देने का वादा करते हैं।

जब ये ठग किसी तीसरे व्यक्ति से ऑनलाइन धोखाधड़ी करते हैं, तो वे ठगी का पैसा सीधे अपने खाते में न मंगाकर, इन्हीं किराए के खातों में मंगाते हैं। पुलिस जब ठगी की जांच करती है, तो वह पैसे के ट्रेल का पीछा करते हुए उस बैंक खाते तक पहुंचती है जिसमें पैसा आया है। ऐसे में पुलिस असली ठग को नहीं, बल्कि उस निर्दोष व्यक्ति को पकड़ती है जिसके नाम पर खाता खुला है।

किसी अंजान व्यक्ति को अपना खाता कभी न दें

पुलिस अधीक्षक निकेतन कदम ने कहा कि अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पिन, या नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के। के लिए न दें, चाहे वह कितना भी करीबी क्यों न हो। अगर कोई आपको केवल खाता खुलवाने के बदले पैसे देने का वादा करता है, तो समझ जाएं कि यह एक जाल है। आप एक बड़े साइबर अपराध में भागीदार बन सकते हैं। इसलिए ऐसे ऑनलाइन साइबर ठगी से बचे।

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