Adgaon Budruk Fire Incident (फोटो क्रेडिट-X) 
अकोला

Akola Tragedy: अकोला में 'डीजल' बना काल, 6 साल की मासूम सहित 3 की जिंदा जलकर मौत

Adgaon Budruk Fire Incident: अकोला के अडगांव में भीषण आग से 6 साल की बच्ची समेत 3 की मौत। घर में रखे अवैध डीजल से आग भड़कने का आरोप। स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नहीं मिले।

अनिल सिंह

Akola House Fire: महाराष्ट्र के अकोला जिले से एक अत्यंत हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ 'डीजल' काल बनकर आया और एक ही घर में रहने वाले तीन लोगों की जिंदगी लील गया। अकोट तहसील के अडगांव बुद्रुक गांव में गुरुवार, 12 फरवरी की शाम को एक मकान में लगी भीषण आग ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल भी खोल दी। इस दर्दनाक हादसे में 6 साल की मासूम बच्ची समेत तीन लोगों की मौत हो गई है।

असुरक्षित तरीके से रखे गए ज्वलनशील पदार्थ और समय पर चिकित्सा सहायता न मिलना इस त्रासदी के बड़े कारण बनकर उभरे हैं।

आग का तांडव और बेबस जान

घटना शाम करीब 7 बजे साप्ताहिक बाजार के पास स्थित शेख इब्राहिम के मकान में हुई। आग इतनी भीषण थी कि घर के अंदर मौजूद किराएदारों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। धुएं और लपटों ने मिनटों में पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया।

मृतकों की पहचान: 6 वर्षीय मासूम स्वरा प्रभुदास सोलंके और 27 वर्षीय अनिल उकर्डा चव्हाण की घटनास्थल पर ही जलकर मौत हो गई।

अस्पताल में तोड़ा दम: 55 वर्षीय रत्ना उकर्डा चव्हाण गंभीर रूप से झुलस गई थीं। उन्हें अकोला के शासकीय मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया।

असुरक्षित डीजल या शॉर्ट सर्किट?

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि घर के भीतर अवैध और असुरक्षित तरीके से बड़ी मात्रा में डीजल जमा करके रखा गया था। इसी वजह से मामूली चिंगारी ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। हालांकि, पुलिस प्रशासन और तहसीलदार महेश रामगुंडे ने प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को संभावित कारण बताया है। मामले की गहराई से जांच के लिए फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया है, जो इस बात की पुष्टि करेगी कि क्या वास्तव में घर में ज्वलनशील पदार्थ का अवैध भंडारण किया गया था।

स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी लापरवाही

इस हादसे ने स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं की दयनीय स्थिति को भी उजागर कर दिया है। जब झुलसे हुए लोगों को नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, तो वहां कोई भी डॉक्टर या स्टाफ मौजूद नहीं था। इस गंभीर लापरवाही के कारण घायलों को समय पर प्राथमिक उपचार नहीं मिल सका, जिससे उनकी स्थिति और बिगड़ गई। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि आपातकालीन स्थिति में भी सरकारी केंद्र खाली पड़ा था। फिलहाल पुलिस और अग्निशमन विभाग की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है ताकि दोषियों पर कार्रवाई की जा सके।

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