अकोला के तेल्हारा में सड़क किनारे अंतिम संस्कार करने को मजबूर लोग (फोटो नवभारत)
अकोला

अकोला: सड़क किनारे चिताएं जलाने को मजबूर तेल्हारा के नागरिक, अंतिम संस्कार के लिए भी नहीं जगह

Roadside Cremation In Akola: तेल्हारा स्थित पांढरी क्षेत्र में स्वतंत्र श्मशानभूमि नहीं होने से लोगों को मेन सड़क किनारे अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। बारिश में परेशानी और हादसे का खतरा बढ़ जाता है।

आलोक उमाकृष्ण

Roadside Cremation In Akola Telhara: अकोला जिले के तेल्हारा शहर की सीमा में शामिल किए गए पांढरी क्षेत्र के नागरिकों को आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

हालात इतने गंभीर हैं कि किसी नागरिक की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के लिए भी सुरक्षित और स्वतंत्र जगह उपलब्ध नहीं है। मजबूरी में मुख्य सड़क के किनारे ही लकड़ियां रखकर अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। इससे जहां मृतक के सम्मानजनक अंतिम संस्कार का सवाल खड़ा हो गया है, वहीं सड़क से गुजरने वाले वाहनों के कारण हादसे का खतरा भी बना रहता है।

पांढरी क्षेत्र में किसी नागरिक की मृत्यु होने के बाद परिवार और रिश्तेदारों को अंतिम संस्कार के लिए जगह तलाशनी पड़ती है। कोई उचित स्थान उपलब्ध नहीं होने के कारण आखिरकार मुख्य सड़क के किनारे ही चिता सजाने की नौबत आती है।

बारिश में और गंभीर होती है समस्या

बारिश के मौसम में अकोला जिले के तेल्हारा स्थित पांढरी क्षेत्र के नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। यहां स्वतंत्र और सुविधायुक्त श्मशानभूमि नहीं होने से अंतिम संस्कार के दौरान परिवारों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बारिश से बचने के लिए शेड की व्यवस्था नहीं है।

इसके अलावा पीने और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए पानी, स्वच्छता तथा बैठने जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में बारिश के बीच अंतिम संस्कार करना परिवार के लिए बेहद कठिन हो जाता है। नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को जल्द से जल्द सुरक्षित और सुविधायुक्त श्मशानभूमि उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि सम्मानजनक अंतिम संस्कार हो सके।

स्वतंत्र श्मशानभूमि के लिए बार-बार मांग

65 पांढरी क्षेत्र तेल्हारा नगर परिषद की सीमा में शामिल होने के बाद यहां के नागरिकों की समस्याएं हल करने की जिम्मेदारी नगर परिषद और प्रशासन की है। स्वतंत्र, सुरक्षित और सभी सुविधाओं से युक्त श्मशानभूमि के लिए नगर परिषद अध्यक्ष और मुख्याधिकारी से बार-बार मांग की गई है।

इसके बावजूद अब तक नगर पालिका की ओर से कोई ठोस भूमिका नहीं अपनाई गई है। ऐसे में संवाद और संयम आखिर कब तक बनाए रखा जाए, यह सवाल निर्माण हो गया है।

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