प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
अकोला

अकोला मनपा में सफाई ठेके में बड़ा घोटाला? कर्मचारियों के नाम पर हर माह 48 लाख का फर्जीवाड़ा

Akola Municipal Scam News: मनपा में सफाई ठेकेदारों का बड़ा खेल, आधे कर्मचारी नियुक्त कर उठा रहे पूरा भुगतान हर महीने करीब 48.45 लाख रुपये का चूना। कागजों पर फुल स्टॉफ, जमीन पर व्यवस्था ठप है।

रूपम सिंह

Municipal Corporation News: अकोला महानगर पालिका में स्वच्छता का मुद्दा एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। शहर के 80 वार्डों में से 51 वार्डों को पड़ीक (पिछड़ा) वार्ड घोषित कर दिया गया है। इन वार्डों में कागजों पर सफाई दिखाने के लिए ठेकेदारों के माध्यम से सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। वास्तविकता यह है कि इन वार्डों में नियमित सफाई का काम नहीं हो रहा है, जबकि ठेकेदार पूरे कर्मचारियों की उपस्थिति का दावा कर रहे हैं।

अब तक प्रशासक के रूप में आयुक्तों ने इस व्यवस्था को चलाया, लेकिन 16 फरवरी को होने वाली महासभा में यह विषय अजेंडे पर लाया जा रहा है। प्रशासन की इस चाल से अब यह जिम्मेदारी सत्ताधारी पक्ष के गले पड़ने वाली है। महानगर पालिका में पड़ीक वार्डों की ठेकेदारी व्यवस्था से स्वच्छता का मुद्दा फिर से विवादों में है। कागजों पर सफाई दिखाकर ठेकेदारों को लाखों का भुगतान किया जा रहा है, जबकि जमीन पर सफाई का काम अधूरा है। अब 16 फरवरी की महासभा में इस विषय पर क्या निर्णय होता है, इस पर नागरिकों की नजरें टिकी हैं। 51 पड़ीक वार्डों के लिए प्रत्येक वार्ड में 12 सफाई कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं।

29 प्रशासकीय वार्डों के लिए प्रत्येक वार्ड में 25 कर्मचारी हैं। लेकिन वास्तविकता में किसी भी वार्ड में नियमित सफाई नहीं हो रही है। स्वच्छता के नाम पर केवल ठेकेदारों को भुगतान किया जा रहा है। इस व्यवस्था से हर महीने जनता की जेब से लाखों रुपये ठेकेदारों की जेब में जा रहे हैं। अनुमान है कि प्रत्येक वार्ड से लाखों का बिल बनता है और कुल मिलाकर लगभग 49 लाख रुपये मासिक ठेकेदारों को दिए जाते हैं।

तत्कालीन आयुक्त नीमा अरोरा ने इस गड़बड़ी को पहचानकर 31 पड़ीक वार्डों में ठेकेदारी व्यवस्था बंद कर दी थी और सफाई का काम महानगर पालिका के स्थायी कर्मचारियों से कराया था। वर्तमान में अकोला महानगर पालिका के पास 748 स्थायी सफाई कर्मचारी हैं। ऐसे में फिर से ठेकेदारों को काम सौंपने पर सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि पड़ीक वार्डों की ठेकेदारी से नगरसेवकों की सुविधा होती है। प्रशासक राजवटी में आयुक्तों ने अपनी मर्जी से यह व्यवस्था चलाई, लेकिन अब इसे महासभा में लाकर सत्ताधारी पक्ष पर अनियमितता का ठपका लगाने की तैयारी की जा रही है।

मनपा को लाखों का नुकसान

एक प्रभाग में 4 वार्ड होते हैं और प्रत्येक वार्ड में 12 सफाई कर्मचारी होने चाहिए। लेकिन ठेकेदार केवल आधे कर्मचारी ही नियुक्त करते हैं। इसके बावजूद उन्हें पूरे भुगतान मिलते हैं। एक वार्ड से ठेकेदार को हर महीने लगभग 95 हजार रुपये का भुगतान होता है। 51 ठेकेदार मिलकर हर महीने महानगर पालिका से लगभग 48 लाख 45 हजार रुपये निकालते हैं। वास्तविकता में सफाई कार्य पर आधे कर्मचारी ही उपस्थित रहते हैं।

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