मलकापुर चुनाव गरमा गया! (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
अकोला

मलकापुर का चुनावी माहौल गरमाया! उम्मीदवारी से ज्यादा गुटबाजी और बगावत की चर्चा

Election Controversy Maharashtra: मलकापुर नगर परिषद चुनाव से पहले गुटबाजी, बगावत और दावेदारों की होड़ ने माहौल गरमा दिया है। महापौर पद ओबीसी के लिए आरक्षित होने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

आंचल लोखंडे

Malkapur Municipal Council: मलकापुर नगर परिषद के पंचवर्षीय चुनाव की सरगर्मी शुरू हो चुकी है। 10 तारीख से नामांकन प्रक्रिया जारी है, लेकिन शहर में राजनीतिक माहौल उम्मीदवारों की घोषणा से पहले ही गर्म हो गया है। प्रमुख दलों द्वारा आधिकारिक उम्मीदवार घोषित न किए जाने के बावजूद इच्छुक दावेदारों की गतिविधियां, गुप्त बैठकें और लगातार चल रही चर्चाओं ने माहौल को पूरी तरह चुनावी बना दिया है।

इस बार महापौर पद सामान्य ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित है, जिससे पार्टियों में ओबीसी उम्मीदवारों की होड़ तेज हो गई है। भाजपा में मिलिंद दावले और आशीष माहुरकर प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। पार्षद पद के इच्छुकों की संख्या भी तेज़ी से बढ़ रही है। कांग्रेस में वंदनाताई रावल, राजू पाटिल और चेतना राठी के नामों पर जोरदार चर्चा चल रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) में प्रसाद जाधव सबसे आगे बताए जा रहे हैं।

महापौर पद के लिए किस नाम पर अंतिम मुहर

पिछले कार्यकाल में सत्ता में रही कांग्रेस इस बार टिकट वितरण को लेकर बड़ी दुविधा में है। विभिन्न गुटों के नेता अपने समर्थकों को टिकट दिलाने में सक्रिय हो गए हैं, जिससे वर्तमान और पूर्व नगरसेवकों में असंतोष बढ़ रहा है। कुछ नेताओं ने टिकट न मिलने पर बगावत करने की भी तैयारी कर ली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का पूरा समीकरण इस बात पर निर्भर करेगा कि महापौर पद के लिए किस नाम पर अंतिम मुहर लगती है।

उम्मीदवारी को लेकर जारी अफवाहों ने पूरे शहर में हलचल मचा दी है। कई दावेदारों ने तो निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में तैयारी भी शुरू कर दी है। वार्ड स्तर पर भी गुटबाजी तेज हो गई है, जिससे आंतरिक टकराव साफ दिखाई देने लगा है। इन राजनीतिक उठापटक के बीच नागरिकों की मूलभूत समस्याएँ अब भी जस की तस हैं।

• गड्ढों से भरी सड़कें

• नालियों की बदहाल सफाई

• पानी की किल्लत

जनता की समस्याओं पर अनदेखी

चुनाव आते हैं तो वादों की बौछार शुरू हो जाती है, लेकिन जनता की समस्याएँ अनदेखी ही रह जाती हैं। वर्तमान स्थिति में मलकापुर की राजनीति में “उम्मीदवारी” से ज्यादा गुटबाजी, बगावत और अंदरूनी संघर्ष की चर्चा है। माना जा रहा है कि यदि दलों ने उम्मीदवारों की घोषणा में और देरी की, तो कुछ पार्टियों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है। जहाँ कांग्रेस सत्ता वापसी की कोशिश में जुटी है, वहीं भाजपा कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी का लाभ लेने की रणनीति बना रही है।

दोनों ही प्रमुख दलों ने नगर परिषद पर कब्ज़ा जमाने के लिए तैयारी तेज कर दी है, लेकिन शहर की नजर केवल एक घोषणा पर टिकी है। आखिर महापौर पद के लिए किसका नाम सामने आएगा? उम्मीद है कि उम्मीदवारों की घोषणा होते ही चुनावी तापमान और बढ़ जाएगा।

यूपी कांग्रेस में बड़ा फेरबदल, आराधना मिश्रा मोना बनीं प्रदेश अध्यक्ष; इमरान मसूद को भी मिली बड़ी जिम्मेदारी

Pargat Singh: परगट सिंह बने पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष, वड़िंग की जगह संभालेंगे कमान

Kal Ka Mausam: 3 अक्टूबर को कैसा रहेगा मौसम? दिल्ली, UP, बिहार से नॉर्थ ईस्ट तक, जानें IMD का ताजा अपडेट

ज्ञानु नहीं तो नंदु का इस्तीफा लेंगे... अभिजीत दीपके ने दी PM मोदी के इस्तीफे की चेतावनी!

Jantar Mantar Protest: जंतर मंतर पर बवाल, सैकड़ों लोगों के किया गया डीटेन; आज दिन भर क्या-किया हुआ?