अकोला काटेपूर्णा बांध फाईल फोटो (सोर्स - सोशल मीडिया) 
अकोला

अकोला के जलाशयों में पानी नहीं, काटेपूर्णा बांध में अब केवल सिर्फ 19.61% पानी शेष, 5 दिन बाद आ रहे नल

Katepurna Dam: अकोला के काटेपूर्णा बांध में जल स्तर घटकर 19.61% रह गया है। मानसून की बेरुखी से जिले के 12 लघु प्रकल्प सूखे हैं, जिससे शहर में 5वें दिन जलापूर्ति हो रही है। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

केतकी मोडक

Akola Katepurna Dam Water Shortage: अकोला जिले के महान गांव में स्थित काटेपूर्णा बांध से पूरे शहर में जलापूर्ति की जाती है। इस समय काटेपूर्णा बांध में 19.61 प्रश पानी बचा है। देखा जाए तो यह जलभंडारण काफी कम है। विशेष बात यह है कि, जून माह समाप्त हो गया है और अब तक जैसी दमदार बारिश होनी चाहिए थी नहीं हुई है। लगातार बाष्पीकरण के कारण जल प्रकल्पों में दिन-प्रतिदिन पानी घटता जा रहा है। इस समय अकोला शहर में पांचवें दिन नलों द्वारा जलापूर्ति की जा रही है। आए दिन जल प्रकल्पों में पानी कम होता जा रहा है।

जानकारी के अनुसार जिले में कुल 24 लघु प्रकल्प हैं, जिसमें से 12 प्रकल्प पूरी तरह से सूख गए हैं। बचे हुए 12 प्रकल्पों में बहुत ही कम पानी शेष है। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के कारण शहर में जल संकट की स्थिति धीरे-धीरे गंभीर हो सकती है। अकोला शहर को पेयजल आपूर्ति करने वाले महान गांव स्थित काटेपूर्णा बांध में जल भंडारण लगातार घट रहा है। वर्तमान में बांध में केवल 19.61 प्रतिशत जल भंडारण शेष बचा है।

देखा जाए तो पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष जल भंडारण ठीक है। पिछले वर्ष इन्हीं दिनों में काटेपूर्णा बांध में 19.72 प्रश जल भंडारण था। उस अनुसार स्थिति ठीक है। जल उपलब्धता कम होने के कारण अकोला मनपा को जल वितरण में कटौती करनी पड़ रही है। स्थिति यह है कि शहर में पांचवें दिन नलों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है।

लोगों को भर कर रखना पड़ता है पानी

पांच दिनों में एक बार जलापूर्ति होने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक कठिनाई उन परिवारों को हो रही है जो पूरी तरह मनपा की जलापूर्ति पर निर्भर हैं। ऐसे लोगों को पांच दिनों के लिए पेयजल और घरेलू उपयोग का पानी एक साथ संग्रहित करना पड़ता है। घरों में सीमित स्थान होने के कारण कई परिवारों को पानी के भंडारण में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नागरिकों का कहना है कि जिस दिन नलों से पानी आता है, उस दिन उन्हें अपने अन्य कार्य छोड़कर पानी भरने में समय लगाना पड़ता है। कई बार निर्धारित समय में पर्याप्त पानी नहीं मिलने से समस्या और बढ़ जाती है।

नहीं हैं वैकल्पिक जल स्रोत

हालांकि कुछ परिवारों के पास बोरवेल, हैंडपंप या इलेक्ट्रिक पंप जैसे वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध हैं, लेकिन केवल नल जलापूर्ति पर निर्भर लोगों की स्थिति अधिक चिंताजनक बनी हुई है। अकोला शहर के कई क्षेत्रों से भूजल स्तर में गिरावट की भी शिकायतें सामने आ रही हैं। निजी बोरवेल और इलेक्ट्रिक पंपों में भी पानी का स्तर कम हो गया है। परिणामस्वरूप कई इलाकों में वैकल्पिक स्रोतों से भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।

जरूरत पड़ने पर टैंकरों से जलापूर्ति

महापौर शारदा खेडकर ने कहा है कि  "शहर के किसी भी क्षेत्र में पानी समस्या उत्पन्न नहीं होने दी जाएगी। यदि आवश्यकता पड़ी तो महानगरपालिका प्रशासन द्वारा टैंकरों से जलापूर्ति की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि, संभाल कर पानी का उपयोग करें, मनपा प्रशासन निश्चित ही पानी समस्या उत्पन्न होने से पहले ही टैंकरों द्वारा जलापूर्ति शुरू करेगा। इसलिए शहरवासी चिंता न करें।"

जिले में वर्तमान स्थिति

प्रकल्प का नाम वर्तमान जल भंडारण (प्रतिशत में)
वान 41.08%
मोनी 42.47%
निर्गुणा 17.30%
उमा 3.34%

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