नासिक-पुणे सेमी हाई-स्पीड रेल के रूट बदलने का विरोध, शिर्डी रूट नहीं मंजूर, सीधे मार्ग पर अड़े जनप्रतिनिधि

High Speed Rail Route Change: नासिक-पुणे सेमी हाई-स्पीड रेलवे को शिर्डी होकर ले जाने के प्रस्ताव का सर्वदलीय विरोध। जनप्रतिनिधियों ने सीधे मार्ग की मांग करते हुए सीएम से मिलने का फैसला किया।
Nashik-Pune Semi High Speed Rail Route Change Opposition
नासिक-पुणे रेलवे का मार्ग बदलने का विरोध (फोटो नवभारत)
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Nashik-Pune Semi High Speed Rail Route Change: नासिक-पुणे सेमी हाई-स्पीड रेलवे मार्ग को शिरडी की तरफ घुमाने के प्रस्ताव का सभी राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों ने कड़ा विरोध किया है। परियोजना को शिर्डी की ओर मोड़ने के प्रस्ताव का सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों ने एकजुट होकर विरोध किया है।

उनका कहना है कि यदि रेलवे लाइन को मूल योजना से हटाकर शिर्डी की ओर ले जाया गया तो परियोजना का उद्देश्य प्रभावित होगा और यात्रा समय भी बढ़ेगा। इसी मुद्दे पर जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल की अध्यक्षता में विधानसभा परिसर में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से यह मांग रखी गई कि रेल परियोजना को पहले से प्रस्तावित सीधे मार्ग पर ही लागू किया जाए। बैठक में नेताओं ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में अनावश्यक बदलाव से क्षेत्रीय संतुलन और जनहित दोनों प्रभावित होंगे।

पूर्व निर्धारित मार्ग को ही बताया सबसे सबसे उचित विकल्प

बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने कहा कि नासिक-पुणे सेमी हाई-स्पीड रेलवे को संगमनेर, अकोले, आलेफाटा, नारायणगांव, मंचर, राजगुरुनगर और चाकण होते हुए पूर्व निर्धारित सीधे मार्ग से ही बनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यही मार्ग सबसे कम दूरी वाला, आर्थिक रूप से व्यावहारिक और यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक साबित होगा।

इस अवसर पर पूर्व मंत्री दिलीप वलसे पाटिल, एडवोकेट माणिकराव कोकाटे, पूर्व सांसद शिवाजीराव पाटिल, विधायक विठ्ठलराव लंघे-पाटिल, प्राजक्त तनपुरे, बाबाजीशेठ काले, शरद सोनवणे, अमोल खताल और अक्षय कर्डिले सहित विभिन्न दलों के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि यह परियोजना केवल दो शहरों को जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर महाराष्ट्र और पुणे क्षेत्र के आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री से मुलाकात का निर्णय

बैठक में यह भी तय किया गया कि पूर्व निर्धारित मार्ग के अंतर्गत आने वाले सभी क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करेगा और सीधे मार्ग को मंजूरी देने की मांग करेगा।

नेताओं ने कहा कि किसानों, छात्रों, युवाओं, उद्यमियों और स्थानीय नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार को परियोजना के मूल स्वरूप को बरकरार रखना चाहिए। उनका मानना है कि सीधे मार्ग से रेलवे बनने पर यात्रा समय कम होगा, व्यापार और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।

बैठक में मौजूद सभी जनप्रतिनिधियों ने संकल्प लिया कि जब तक परियोजना को पूर्व निर्धारित सीधे मार्ग से स्वीकृति नहीं मिलती, तब तक वे अपने प्रयास जारी रखेंगे और आवश्यकता पड़ने पर व्यापक जनआंदोलन भी किया जाएगा।

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