Mukhyamantri Saur Krushi Vahini Yojana 2.0: किसानों को सिंचाई के लिए दिन में भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 अकोला परिमंडल में तेजी से आगे बढ़ रही है। योजना के तहत अकोला, बुलढाना और वाशिम जिलों में अब तक 108 विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा प्रकल्प कार्यान्वित हो चुके हैं। इन प्रकल्पों से कुल 449 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इसका सीधा लाभ परिमंडल के 1 लाख 11 हजार 145 किसान ग्राहकों को मिल रहा है और उन्हें खेती के लिए दिन में बिजली उपलब्ध हो रही है।
मुख्य अभियंता दत्तात्रय बनसोडे ने बताया कि किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराना इस महत्वाकांक्षी योजना का प्रमुख उद्देश्य है। योजना के तहत महावितरण के 33 केवी क्षमता वाले 174 उपकेंद्रों के लिए 206 स्थानों पर सौर ऊर्जा प्रकल्प स्थापित किए जा रहे हैं। इनसे कुल 756 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले करीब 60 प्रश यानी 449 मेगावाट क्षमता के प्रकल्प अब तक शुरू हो चुके हैं।
महावितरण के प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्र के मार्गदर्शन में योजना के काम को गति दी गई है। सौर प्रकल्पों से उत्पादित बिजली नजदीकी उपकेंद्रों के माध्यम से सीधे किसानों को सिंचाई के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसानों को रात के समय खेतों में जाकर सिंचाई करने की मजबूरी काफी हद तक खत्म हुई है। दिन में बिजली मिलने से सिंचाई व्यवस्था सुचारु होने के साथ फसल पद्धति में भी सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहे हैं।
अकोला जिले में 73 स्थानों पर 247 मेगावाट क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें से 44 स्थानों पर प्रकल्प शुरू हो चुके हैं और 190 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इसका लाभ 50,052 किसानों को मिल रहा है। बुलढाना जिले में 82 स्थानों पर 339 मेगावाट का लक्ष्य है। यहां 34 स्थानों पर 136 मेगावाट क्षमता के सौर प्रकल्प कार्यान्वित हो चुके हैं, जिससे 26,849 किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध हो रही है. वाशिम जिले में 51 स्थानों पर 170 मेगावाट का लक्ष्य निर्धारित है।
इनमें से 30 स्थानों पर 123 मेगावाट क्षमता के प्रकल्प शुरू हो चुके हैं। इससे 34,244 किसानों को सिंचाई के लिए दिन की बिजली का लाभ मिल रहा है। महावितरण का लक्ष्य शेष प्रकल्पों का काम भी तेजी से पूरा कर परिमंडल के सभी पात्र किसानों को योजना का लाभ पहुंचाना है। इससे खेती के लिए बिजली आपूर्ति अधिक भरोसेमंद होने के साथ किसानों को सिंचाई के लिए रात में खेतों में जाने की परेशानी से भी स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है।