Former Councillors Akola:अकोला महानगरपालिका चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया) 
अकोला

64 पूर्व पार्षद और 102 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में, साढ़े तीन साल बाद अकोला में राजनीतिक रणसंग्राम

Former Councillors Akola: अकोला महानगरपालिका चुनाव 2026 में 64 पूर्व पार्षद और 102 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसमें वंशवाद और दल-बदल का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

आंचल लोखंडे

Akola Municipal Election: साढ़े तीन वर्षों की लंबी प्रशासनिक व्यवस्था के बाद अकोला महानगरपालिका के आम चुनाव होने जा रहे हैं, और शहर का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस चुनाव में कुल 64 पूर्व पार्षद फिर से अपनी किस्मत आज़माने के लिए मैदान में उतर रहे हैं।

चुनाव में वंशवाद का असर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। 17 पूर्व पार्षदों ने स्वयं की बजाय अपने परिवार के सदस्यों को उम्मीदवार बनाया है। कहीं पति की जगह पत्नी, तो कहीं पत्नी की जगह पति और कहीं मां की जगह बेटे को उतारकर राजनीतिक वर्चस्व बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

भाजपा ने इस चुनाव में झोंक दी पूरी ताकत

सत्ताधारी भाजपा ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा के 31 पूर्व पार्षद स्वयं या अपने परिजनों के माध्यम से चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि, प्रभाग पद्धति में हाल ही में हुए बदलावों के कारण दिग्गज उम्मीदवारों को मतदाताओं तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है।

निर्दलीयों की बड़ी चुनौती

टिकट न मिलने से कई दिग्गज नेताओं ने बगावत कर निर्दलीय या अन्य दलों से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। इस बार कुल 102 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं, जो कई प्रभागों में प्रमुख दलों के लिए चुनौती साबित होंगे। बड़े पैमाने पर हुए दल-बदल के कारण मतदाताओं के लिए यह पहचानना कठिन हो गया है कि कौन-सा उम्मीदवार किस प्रभाग और किस चुनाव चिन्ह पर लड़ रहा है। इस चुनाव में पारिवारिक राजनीति, दल-बदल और निर्दलीयों की सक्रियता से अकोला शहर का राजनीतिक परिदृश्य बेहद चुनौतीपूर्ण और रोमांचक बन गया है।

सत्ताधारी दलों तथा विरोधी पार्टियों दोनों के लिए चुनौती

चुनाव में इतने बड़े पैमाने पर पूर्व पार्षदों और निर्दलीय उम्मीदवारों की भागीदारी से मतदाताओं के लिए चुनावी विकल्पों का दायरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मतदाता केवल पार्टी लाइन पर नहीं बल्कि उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि, पारिवारिक पृष्ठभूमि और उनके पिछले कार्यों को ध्यान में रखकर मतदान करेंगे। इसके कारण चुनाव परिणाम किसी भी पूर्वानुमान से अलग हो सकते हैं और सत्ताधारी दलों तथा विरोधी पार्टियों दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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